सबसे बड़ी जीत..मन, इन्द्रिय और स्वयं के विकारों की है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

धर्म

सबसे बड़ी जीत..मन, इन्द्रिय और स्वयं के विकारों की है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

 

   खमेरा राजस्थान

अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने खमेरा लाल मंदिर में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि। दूसरों को समझाना सरल है परन्तु स्वयं को समझना, स्वयं को समझाना, और समझदारी का जीवन जीना – आज सबसे कठिन काम हो गया है। 

 

 

 

 

आज का समय – दूसरों को सुधारने, समझाने और गलती बताने का चल रहा है। स्वयं क्या कर रहे हैं, यह स्वयं भूल रहे हैं। यही भूल हमारे विकास जीवन में बाधक बन रही है।

 

 

 

 

मनुष्य एक सम्भावना है, वह नीचे गिरे तो पशु से बदतर जीवन जी सकता है और ऊपर उठे तो परमेश्वर भी बन सकता है। मनुष्य एक अद्भुत प्राणी है, वह नर से नारायण, पशु से परमेश्वर, भक्त से भगवान, और तिर्यञ्च से तीर्थंकर बन सकता है।

 

 

 

 

इसलिए मनुष्य के जीवन में —

गुण ना हो तो रूप व्यर्थ है ।

भूख ना हो तो भोजन व्यर्थ है,

उदारता ना हो तो धन व्यर्थ है,

विनय गुण ना हो तो विद्या व्यर्थ है,

अर्थ ना हो तो शब्द व्यर्थ है,

परोपकार ना हो तो जीवन व्यर्थ है, औरश्रद्धा, भक्ति, विश्वास ना हो तो पूजा, पाठ, सेवा व्यर्थ है…! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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