स्मृति का झरोखा बच्चों को नौकरी पर भेजने वालों को बुढ़ापे में पछताना पड़ता है: सुधासागर महाराज
पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज वर्ष 2017इंद्रगढ़ प्रवास के दौरान मंगल उद्बोधन बच्चों को नौकरी पर भेजने वालों को बुढ़ापे में पछताना पड़ता है: सुधासागर महाराजजिज्ञासा समाधान शिविर में महाराज ने सफल जिंदगी से जुड़े कई तथ्य बताए
इंद्रगढ़
शहर के जैन अतिशय तीर्थस्थल में जिज्ञासा समाधान शिविर में सुधासागर महाराज ने कहा कि मंदिर इतना पास भी नहीं रखें कि आप अपने गृहस्थ कार्य भी ना कर सकें और इतना भी दूर ना रखें कि वहां तक आप पहुंच ही ना सकें।
उन्होंने कहा कि अपने घरों से सटाकर कभी मंदिर या चैत्यालय नहीं बनाना चाहिए। यह बहुत बड़ा दोष माना जाता है। ऐसे मकानों में रहने वालों की कई पीढ़ियां बर्बाद होते हुए देखी गई हैं। हालांकि भगवान कभी भी किसी का बुरा नहीं करते, परंतु हम स्वयं उनकी मर्यादा नहीं रख पाते। इसी कारण हमारा स्वयं बुरा हो जाता है।

महाराज ने कहा कि वास्तविक जैनी तो वही है जो अपने बच्चों को एक गद्दी या व्यापार बना कर देता है, क्योंकि बेटा यदि कमजोर भी होगा तो कम से कम तुम्हारे साथ बैठकर उस व्यापार को संभालना शुरू कर देगा। महाराज ने कहा कि जिन लोगों की गद्दी या फिर व्यापार होता है, उनके बच्चे उनसे भी बड़े व्यापारी बनते हुए देखे गए हैं, जबकि अधिकतर नौकरी करनेवालों के बच्चे अपने पिता के समान ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाते। ध्यान रहे कि आजकल जो भी माता-पिता अपने बच्चों को नौकरी की तरफ भेज रहे हैं, उन्हें बाद में बुढ़ापे में पछताना पड़ रहा है। यह भी कहा कि कार्य हमेशा अपनी शक्ति के अनुसार ही करना चाहिए।
यदि शक्ति नहीं है, तो आपको पुण्य तो मिलेगा, लेकिन कुछ ना कुछ नंबर अवश्य कम हो जाएंगे। वर्तमान युग धर्म का नहीं होकर धन का युग है क्योंकि आजकल के लोग धर्म को छोड़कर धन की ओर भागते जा रहे हैं। यही कारण है कि आज पंचम काल में रिद्धि-सिद्धि एवं चमत्कार सब समाप्त हो गए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं में तो फिर भी धर्म के प्रति संस्कार मिलते हैं क्योंकि महिलाएं ऐसी जगहों पर रहना पसंद नहीं कर पाती, जहां पर मंदिर ना हो। आजकल के लोग धन कमाने के लिए विदेशों तक चले जाते हैं।
जैन अतिशय तीर्थस्थल से विहार करते हुए जैन मुनि सुधासागर जी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी 9929747312
