जब किसी को समझाना मुश्किल हो जाये..तो खुद को समझा लेना ही समझदारी है..!अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
प्रतापगढ़ राजस्थान
आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने कहा सब सोच समझ की अनुपस्थिति है। जब आप सोचते हैं तब समझते नहीं है, और जब समझते हैं तब सोच गायब हो जाती है। कभी आपने सोचा-? कि जब आप सोच रहे होते हैं, तो आपके दिमाग के भीतर असल में क्या चल रहा होता है-? अन्तर्मन में सोच – शब्दों से या वाक्यों से चलती है। लेकिन रिसर्च बताती है कि 80% विचार बिना भाषा के होते हैं और जब तक हम उसे प्रकट करते हैं यह समझते हैं, उससे चार सैकेंड पहले ही दिमाग उस पर फैसला कर चुका होता है।
हमारे मन की धारा में शब्द केवल एक छोटा-सा हिस्सा है। दरअसल हमारे विचार अक्सर धुंधली तस्वीरों, संवेदनाओं या बिना शब्दों वाले स्वरूपों और अनुभवों के रूप में तैरते रहते हैं। दुनिया में 25% लोग ऐसे हैं जो हर समय शब्दों में सोचते हैं। तकरीबन 20% विचार ऐसे होते हैं जिनमें न कोई तस्वीर होती है और न शब्द। वे केवल जान लेने या महसूस कर लेने का अहसास होते हैं।
जब हम कुछ नहीं कर रहे होते हैं तब भी हमारा दिमाग भीतर ही भीतर बड़े बदलावों की तैयारी कर रहा होता है कोई भी विचार आपके मन में आने से पहले ही – अवचेतन स्तर पर उसका बीज तैयार हो चुका होता है। इसलिए खाली वक्त – दिमाग में कुछ नई चीज गढ़ने में व्यस्त रहता है…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
