आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का समाधि स्थल हमारे लिए वरदान के समान है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

धर्म

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का समाधि स्थल हमारे लिए वरदान के समान है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
डोंगरगढ़
“जो सोता है,तो उसका भाग्य भी सो जाता है,जो जागता है,उसका भाग्य भी जाग जाता है”उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने चंद्रगिरी डोंगरगढ़ क्षेत्र से संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के समाधि स्थल से प्रातःकालीन धर्म सभा को संबोधित करते हुये व्यक्त किये।

 

प्रातः बेला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा , श्री अरुण साव एवं श्री विनोद बडजात्या द्वारा ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया | इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जैन आर्मी छत्तीसगढ़ एवं जैन आर्मी ललितपुर (मध्य प्रदेश) की रही |


श्री विजय शर्मा ने कहा की यह हमारा परम सौभाग्य है की हम इस कार्यक्रम में शामिल हुए एवं मुनि आर्यिका संघ का दुर्लभ आशीर्वाद प्राप्त हुआ और जैन आर्मी की प्रस्तुति की काफी सराहना की | श्री अरुण साव ने अपने उदबोधन में कहा की दिगम्बर जैन मुनि और इतनी अधिक संख्या में आर्यिका संघ का एक साथ दर्शन कर मन बहुत प्रसन्न हुआ एवं डोंगरगढ़ और सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ को इसका लाभ मिल रहा है | मुनि श्री ने कहा कि यह ध्वजारोहण कोई साधारण ध्वजारोहण नहीं है बल्कि देश दुनिया तथा विश्व में तथा भारत में मंगल हो विश्व में शांति पूर्ण वातावरण बना रहे इस मंगल भावना से दिनांक 1 फरवरी से 6 फरवरी तक संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज की प्रथम समाधि दिवस पर यह आयोजन चंद्रगिरी तीर्थ समाधि स्थल पर किया जा रहा है।

मुनि श्री ने कहा कि “राष्ट्रीय ध्वज” तिरंगा राष्ट्र का प्रतीक है उसी प्रकार “केसरिया ध्वज” त्याग और तपस्या तथा धर्म की प्रभावना का प्रतीक है,वही “पचरंगा ध्वज” पंचपरमेष्ठी का प्रतीक माना जाता है जिसे जिनशासन की विशेष आर्मी द्वारा सलामी परेड करते हुये मुख्य अतिथि द्वारा फहराया गया,उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य और मनोरथ की सिद्धि केवल बैठने और सोचने मात्र से नहीं होती उस मनोरथ की पूर्त्ति के लिये पुरुषार्थ करना आवश्यक होता है,”सारा देश जिस तारीख की प्रतिक्षा कर रहा था,वह तारीख आ चुकी है,तथा वह शुभ प्रभात बनकर आप सभी के समक्ष आ गयी है”उन्होंने कहा कि आवश्यकताऐं तथा समस्याएं तो सभी के सामने आती है लेकिन इष्ट की प्राप्ती के लिये वह आवश्यकता और समस्यायें कोई मायने नहीं रखती | वर्तमान में हम सभी को गुरुवर का प्रथम समाधि स्मृति महामहोत्सव जो कि हिंदी मिती से माघ वदी ४ अर्थात 1 फरवरी से माघ वदी ९ अर्थात 6 फरबरी तक यह महामहोत्सव संपूर्ण देश में मनाया जा रहा है। इस महामहोत्सव में आप सभी को भी समाधि स्थल पर भक्तीभाव के साथ सम्मलित होना है |

 

 

उन्होंने कहा कि “बाधायें और व्यवधान कमजोर मन वालों के पास आती है लेकिन जिनका मनोबल मजबूत होता है उनके लिये कोई भी बाधा रोक नहीं पाती” उन्होंने कहा कि आप सभी श्रद्धालुओं के लिये क्षेत्र कमेटी ने तैयारियां पूरी कर रखी है सभी को समय पर उपस्थित होकर धर्म लाभ लेना है। मुनि श्री ने संपूर्ण देश को आह्वान करते हुये कहा कि “दुनिया में आप कोई काम कर सको या न कर सको देश विदेश में घूम सको या न घूम सको मंदिर में जाकर अर्घ्य चढ़ा सको या न चढ़ा सको लेकिन जीवन में दो काम अवश्य करना एक शाश्वत सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेदशिखर जी में जाकर माथा टेकना और अर्घ्य चढ़ाना तथा दूसरा इस युग के सर्वश्रेष्ठ गुरुवर आचार्य विद्यासागर महाराज जी की समाधिस्थल चंद्रगिरी में आकर अपना माथा झुकाना और पूजा का अर्घ्य चढ़ाना” मुनि श्री ने कहा कि यह समाधिस्थल कोई साधारण समाधिस्थल नहीं बल्कि इस युग के महान आचार्य श्री विद्यासागरजी महा मुनिराज की समाधि स्थल है जिन्होंने प्रतिकूलताओं और शारिरिक व्याधियों में भी श्रेष्ट साधना और आत्मा को ज्ञान का मंदिर बनाकर उत्कृष्ट समाधी कैसे की जा सकती है यह सिखा दिया जिसे मैंने स्वयं साक्षात अपनी आँखों से उन पलों को देखा है, मुनि श्री ने कहा कि शरीर तो व्याधियो का मंदिर है,लेकिन गुरुवर ने अपने स्वाध्याय और समता परिणाम से आत्मा को ज्ञान का मंदिर बनाकर रखा और जिस जगह को यह श्रेष्ठता मिली वह स्थान का कण – कण पावन और पवित्र है, इस समाधि स्थल पर मुनिराज भी आकर वंदना करते है परिक्रमा कर कायोत्सर्ग करते है तथा भावना भाते है आपने जिस तरह से समाधि सल्लेखना को प्राप्त किया है उस निसिद्धिका को पाने की मै भी भावना करता हूं”| जिस सिंघासनपर आचार्य परमेष्ठी विराजमान रहे, वह सिंघासन तथा वह कक्ष जहाँ पर आपने साधना की वह स्थान अपने आप पूज्यता को प्राप्त हो जाते है।

 

अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 1 फरवरी से 6 फरवरी तक सिद्धों की आराधना के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान संपन्न होंने जा रहा है | यहाँ पर जिन बिंब विराजमान है और यह स्थान भगवान का समवसरण रुप धारण कर लिया है,इस समवसरण में सिद्धों की आराधना प्रारंभ हो गयी है ।

दयोदय महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया इस अवसर पर मुनि श्री आगम सागर ,मुनि श्री पुनीत सागर ऐलक श्री धैर्य सागर ऐलक श्री निश्चयसागर ऐलक श्री निजानंद सागर,सहित आर्यिकारत्न गुरुमति माताजी, दृणमति माता जी, आदर्शमतिमाताजी,चिंतन मतिमाताजी सभी माताजी संघ सहित तथा संघस्थ ब्रहम्चारी एवं बहनें उपस्थित थी। गुरुवर बात जरा गहरी है, गुरुवर बात जरा गहरी है, क्योंकि हम सबकी जिन्दगी आप में ही ठहरी है |


दोपहर में मुख्य मंत्री श्री विष्णु देव साय ने संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की समाधि स्थली के दर्शन किये एवं उपस्थित मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के दर्शन कर श्रीफल चढ़ाया और आशीर्वाद प्राप्त किया | उन्होंने अपने उदबोधन में कहा की यह डोंगरगढ़ चंद्रगिरी तीर्थ क्षेत्र और आचार्य श्री का समाधि स्थल हमारे लिए वरदान के समान है | जहाँ ऐसे संत रहे हो वहां का कण – कण पावन है | और यह हमारे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है | उन्होंने यहाँ संचालित प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ, हथकरघा को देखा और वहां उपस्थित जनों से बातचीत कर सम्पूर्ण जानकारी ली की यहाँ किस प्रकार से उनको स्वावलंबन की ओर अग्रसर किया जा रहा है | और बच्चों से भी पढाई की उपयोगिता के विषय में काफी चर्चा की | प्रतिभास्थली में पौधारोपण किया |
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रतिभास्थली की छात्राओं को ” एक श्रेष्ठ नागरिक” बनने की सीख।
छात्राओं की समस्त गतिविधि को देखकर प्रतिभास्थली की शिक्षा पद्धति की अनुमोदना की ओर शिक्षा के साथ संस्कारों पर तथा रोजगार के लिए भी तैयार करने की यह शिक्षा मंत्री को बहुत ही अधिक प्रेरणादाई लगी।

   

चंद्रगिरी के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन, निर्मल जैन, सुभाष चन्द जैन, चंद्रकांत जैन, सप्रेम जैन, डोंगरगढ़ जैन समाज के अध्यक्ष श्री अनिल जैन, कोषाध्यक्ष श्री जय कुमार जैन, सचिव श्री यतीश जैन, सुरेश जैन, निशांत जैन, विद्यातन पदाधिकारी श्री निखिल जैन, दीपेश जैन, अमित जैन, सोपान जैन, जुग्गू जैन, यश जैन, प्रतिभास्थली के अध्यक्ष श्री पप्पू भैया सहित समस्त पदाधिकारी उपस्थित थे । विद्यातन के अध्यक्ष श्री विनोद बडजात्या ने बताया कि आज प्रातः देव आज्ञा, गुरु आज्ञा ली गयी तत्पश्चत भगवान का अभिषेक, पूजन, आरती कि गयी | महिलाओं द्वारा सर पर कलश लेकर घट यात्रा निकाली गयी और कलश के जल से पांडाल एवं पूजन स्थल (मंडप) को शुद्ध किया गया | मुख्य अतिथि के द्वारा ध्वजारोहण किया गया तत्पश्चात जैन आर्मी छत्तीसगढ़ एवं जैन आर्मी ललितपुर द्वारा परेड, देव-शास्त्र-गुरु वंदन, आलीशान बहुमान (गेस्ट ऑफ आनर), ध्वज वंदन, संगीत वंदन, तोप सलामी, शाश्वत गान, ध्वज गीत, नृत्य आदि कार्यक्रम हुए | दोपहर में इंद्र – इन्द्राणी प्रतिष्ठा, मंडल एवं समवशरण प्रतिष्ठा संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी कि महापूजा एवं महाआरती हुई| उक्त कार्यक्रम में जैन समाज के एवं अन्य समाज के लोग सम्पूर्ण छत्तीसढ़ एवं भारत के विभिन्न प्रान्तों से अपने गुरुवर के प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव में शामिल हुए | उक्त जानकारी निशांत जैन (निशु) द्वारा दी गयी है|

संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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