*आदि तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती* *सुरेश चंद्र गांधी नौगामा जिला बंसा राजस्थान की रिपोर्ट
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव है । और वागड में अधिकांश गांवों भगवान आदिनाथ की प्रतिमाएं विराजमान है । जो गुरूवार को नगर नगर शोभायात्रा निकलेगी तथा भगवान को जन्म, कल्यांणक महोत्सव हर्षोल्ला्स व भक्ति के साथ मनाऐंगे ।
भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और संस्थापक हैं, जिन्हें ‘आदिनाथ’ के नाम से भी जाना जाता है। वे इक्ष्वाकु वंश के राजा नाभि और रानी मरुदेवी के पुत्र थे, जिनका जन्म अयोध्या में हुआ था। उन्होंने मानव सभ्यता को कृषि, कला, और लेखन (ब्राह्मी लिपि) सिखाकर कर्मभूमि की शुरुआत की। उन्हें कैलाश पर्वत पर निर्वाण प्राप्त हुआ।
भगवान ऋषभदेव के बारे में मुख्य तथ्यः प्रथम तीर्थंकरः ऋषभदेव वर्तमान अवसर्पिणी काल के प्रथम तीर्थंकर हैं।
अन्य नामः आदिनाथ, वृषभदेव, आदिब्रह्मा।
जन्म व परिवारः अयोध्या में राजा नाभि और रानी मरुदेवी के घर जन्म। पत्नी सुनंदा और सुमंगला थीं। संतानः उनके 100 पुत्र (जिनमें सबसे बड़े भरत चक्रवर्ती थे) और 2 पुत्रियाँ (ब्राह्मी और सुंदरी) थीं। योगदानः उन्होंने समाज को असि (युद्ध), मसि (लेखन), कृषि, विद्या, शिल्प और वाणिज्य सिखाया। प्रतीकः उनका प्रतीक (लांछन) बैल (वृषभ) है। दीक्षा व ज्ञानः प्रयाग में वटवृक्ष के नीचे दीक्षा ली और तपस्या के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया।
निर्वाणः फाल्गुन वदी एकादशी को केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद, उन्होंने माघ कृष्णा चतुर्दशी को कैलाश पर्वत पर निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया।
हिंदू परंपरा में, उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। उन्हें आदि पुरुष या संस्थापक के रूप में जाना जाता है।
बांसवाडा जिले में सबसे ज्या दा मुल नायक आदिनाथ भगवान की प्रतिमाएं है —– वागड में सबसे बडे भगवान के रूप मुल नायक के रूप में नौगामा के वागड के बडेबाबा की प्रतिमा है जो 700 वर्ष पुरानी है तथा वीरोदय तीर्थ पर इससे बडी प्रतिमा है परंतु इसकी प्रतिष्ठा बाकी है इस कारण वर्तमान में नौगामा में ही सबसे बडी प्रतिमा है । इसी तरह से बडोदिया,आनंदपुरी, बांसवाडा के आजाद चौक, आदिनाथ कौलोनी परतापुर ,गनोडा, परतापुर बेडवा के बावसी, गांगडतलाई, नौगामा, घाटोल,खोडन,कलिंजरा, भुंगडा आदि गांवों में मुल नायक आदिनाथ भगवान की और लगभग सभी पदमासन प्रतिमाएं विराजमान है ।
