उच्च शिक्षा प्राप्त प्रज्ञा कूमट ने अपनाया वैराग्य का पथ
जीवन के किसी भी पल मे वैराग्य उपज सकता है
ससार मे रहकर प्राणी संसार मे रहकर प्राणी संसार को तज सकता है
बिन कारण दीक्षा लेता है कोई पूर्व जन्म का त्यागी
यह सब जानते है यह देह संसार सब नश्वर है लेकिन मोह बन्धनों मे उलझा हुआ है लेकिन यथार्थ सत्य को समझ को बहुत कम लोग होते जो विरक्ति लेते हुए मोक्ष मार्ग पर बढ़ चलते है ऐसा ही मार्ग अपनाया ब्यावर की राजदुलारी ने अपनी प्रज्ञा को जाग्रत किया अपने नाम को सार्थक करते हुए प्रज्ञा कूमट ने वैराग्य का पथ अपनाया और दीक्षा के लेकर साध्वी बनकर अपनी देह को धन्य कर रही है मन चकित सा हो जाता उच्च शिक्षित चार्टेड अकाउन्टेड श्रीमती सुनीता त्रिलोकचंद कूमट ब्यावर निवासी की दुलारी ने बहुत ऑडिट की लेकिन अब वह उस मार्ग पर चल पड़ी जिस पर चलकर वह स्वयम अपनी आत्मा की ऑडिट करने जा रही है आज के युवक युवती बडे बडे पैकेज के लिये देश छोड़कर विदेशो तक जा रहे है ऐसे मे यह उच्च शिक्षित पुत्री अपने जीवन को धन्य कर रही है मोह माया के बंधन से परे उठकर यह पुत्री आत्म प्रयाण हेतु अग्रसर हो रही है यह दीक्षार्थी संयम पथ पर अग्रसर होते हुए 5oct2022 को ज्ञान गच्छाधिपति श्रुतधर पंडित रत्न पूज्य श्री प्रकाशचन्द जी महाराज की निश्रा मे जोधपुर राजस्थान दीक्षा को अंगीकार कर संसार मार्ग को त्याग कर नया एडमिशन लेगी निष्प्रहता निर्मोहिता के मार्ग पर अल्प उम्र मे चलना कोई सहज नहीं है धन्य है यह बिटिया
अभिषेक जैन लूहाडीया रामगंजमंडी
