आचार्य श्री सुनील सागर महाराज एवम स्वामीनारायण संप्रदाय के स्वामी के बीच हुई धर्म चर्चा
राजकोट
राजकोट के गोंडल रोड स्थित काठियावाड़ बाल आश्रम में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन आध्यात्मिक एकता और सद्भाव का एक अनूठा अवसर प्राप्त हुआ।
स्वामीनारायण संप्रदाय के अपूर्व स्वामी महाराज और उनके साथ दो अन्य स्वामी महाराज ने आचार्य भगवंत 108 सुनील सागरजी महाराज साहब से सौहार्दपूर्ण और संतमय चर्चा की।


इस चर्चा के दौरान, दिगंबर जैन साधु जीवन की कठिन तपस्या, आत्मसंयम और आत्म-साधना के विषय पर सकारात्मक और गहन चर्चा हुई। अपूर्व स्वामी ने जैन साधुओं की अथक साधना के बारे में बताया और अहिंसक जीवन के प्रति आस्था व्यक्त की गई। इसके साथ ही पारस्परिक आध्यात्मिक मूल्यों, शांति, सद्भाव और मानव कल्याण पर विचारों का सार्थक आदान-प्रदान हुआ।



इस अवसर पर आचार्य श्री108 सुनील सागरजी महाराज ने प्रमुख स्वामी महाराज के प्रेरणादायक जीवन और उनके स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए आशीर्वाद दिया। दोनों संप्रदायों के संतों ने समाज में नैतिकता, संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रसार के संकल्प को और मजबूत करने का संदेश दिया।




संतों की इस सभा ने धार्मिक एकता और आपसी सम्मान की भावना को और गहरा किया। विभिन्न संप्रदायों के संतों के बीच इस प्रकार का सकारात्मक संवाद समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। जो धर्म निरपेक्षता सर्व धर्म समभाव का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
