होली के3 अर्थ पंडित श्री अमर कुमार जैन सेवानिवृत्ति व्याख्याता की कलम से
होली के 3 अर्थ हैं* :-
(1) होली अर्थात हम भगवान के “होलिए”। तन, मन, धन, समय, स्वास, स॔कल्प, सब भगवान के लिए है। भगवान के दिए हुए हैं।
(2) होली* :-अर्थात जो बात “होली”सो होली। अर्थात विगत बात (past is past) जो हो गया सो हो गया।


(3) होली:*-अर्थात पवित्रता ( purity) holi अर्थात his holiness .ये तीनों ही अर्थ हमारे लिए बहुत ही कल्याणकारी हैं।
meaning full हैं ।हम वीतराग परमात्मा* के अनुसार जीवन जियें ।


बीती बातों का चिंतन न करें।जीवन को दिव्यता से भरले।पवित्रता को अपनाए।हमारी द्रष्टि, वृत्ति कृत्ति सब आत्मिक हो। विश्व बन्धुत्व की भावना युक्त हों। ऐसी सच्ची होली मनानी हैं l

*यह आठ कर्म को होली …*
*जो बनी तेरी हम जोली …*
*चेतन तू कितनी भोली ….*
*उनके संग ही तू हो ली …..*
*वह डाले भव रंगोली……..*
*तू चारो गति में रो ली…..*
*निज शुध्द भाव को भूली………*
*शुभ-अशुभ भाव में फूली……….*
*जो “होनी” थी सो हो ली….*
*अब जला “कर्म” की होली..*.👫
रंगीए स्वयं को* सफेद अरिहंत* जैसा बनने के लिए
लाल सिद्ध* जैसा बनने के लिये पीला आचार्य* बनने के लिये हरा उपाध्याय* बनने के लिये 


*काला 🖤 ⚫ साधू व्रत* धारण करने के लिए
*किस ने कहा होली जैनो का त्यौहार नही बस मनाने का तरीका सबके जैसा नहीं।*
🙏🥰🙏✍️*रंग वो जो चढ़ जाए और उतरे नहीं*
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*होली का रंग चढ़ा है शाम तक उतर जायेगा और यह रंग उतारना मजबूरी भी है सभी की*
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*धर्म मार्ग पर चलने वाले धर्मानुरागियों पर प्रभु एवं गुरु भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा होता जो जीवन की पूर्णता तक साथ जाता है*
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*रंग चढ़े प्रभु भक्ति का*
*रंग चढ़े गुरु भक्ति का*
*रंग चढ़े जैन संस्कृति का*
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*जैन संस्कृति में जन्म लेने वाले पुण्यवान महानुभाव यह अवश्य ध्यान रखे, कि अन्य बाहरी चकाचौंध को देख कर उनके रंगों में ना डूबे ,क्यों कि वो रंग मौसम बदलने के साथ उतर सकता है ,अपना जैनत्व नहीं खत्म होना चाहिए और ना ही जिन संस्कृति का रंग कभी फीका पड़ना चाहिए*
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*मित्र रंगों के जैसे होते है,*
*जो आपकी जिन्दगी में रंग भरते है,*
*हम कदाचित आपका फ़ेवरेट रंग न* *बन सकें..*
*पर आशा है कि…*
*चित्र पूरा करने में कहीँ तो आपके* *काम अवश्य आ सकेंगे।*
*आपको होली की रंगारंग शुभकामनाएँ
