साधु वासवानी के जन्म जयंती महोत्सव को सारे संसार में मासरहित दिन के रूप में मनाया जाता है
एक ऐसा व्यक्तित्व जिनका नाम साधु वासवानी है उनका जन्म दिन सम्पूर्ण में विश्व मांस रहित दिवस है।
डॉक्टर कल्याण गंगवाल की अपील
शाकाहार के प्रचार प्रसार में अग्रणीय डॉक्टर कल्याण गंगवाल ने इस दिवस पर सभी से अपील की है 25 नवंबर राष्ट्रसंत पूजनीय साधु वासवानी का “जन्म जयंती महोत्सव “सारे संसार में Meatless.Day ( मांस रहित दिन ) के रूपमे मनाया जाता है !चलो हम तैयार हो जाए !मांसाहारी भाईयों को शाकाहारी बनाने में !लाखो अबोल मूक जीवोंकों अभय दान दे ! Bee Voice of Voiceless creatures अहिंसा परमो धर्म की जय हो !
कोन है साधु वासवानी
साधु थानवरदास लीलाराम वासवानी एक भारतीय शिक्षाविद् थे, जिन्होंने शिक्षा में मीरा आंदोलन की शुरुआत की. उन्होंने हैदराबाद, सिंध (पाकिस्तान) में सेंट मीरा स्कूल की स्थापना की. विभाजन के बाद वह पुणे चले गए.
विश्व धर्म सम्मेलन में दिया संदेश
जुलाई 1910 में, जब वासवानी 30 वर्ष के थे, तब वह और उनके गुरु प्रोमोथोलाल सेन के साथ मुंबई से बर्लिन के लिए रवाना हुए. अगस्त 1910 में, उन्होंने बर्लिन में वेल्ट कांग्रेस या विश्व धर्म कांग्रेस में भाग लिया। साधु वासवानी ने भारत के प्रतिनिधि के रूप में सम्मेलन में शांति, भारत की मदद का संदेश दिया.
वासवानी के जीवन और शिक्षण को समर्पित एक संग्रहालय, दर्शन संग्रहालय, 2011 में पुणे में खोला गया था. हर साल, साधु वासवानी मिशन, जो साधु टी.एल. वासवानी के जीवन और मिशन को आगे बढ़ाने का काम करता है, वासवानी के जन्मदिन, 25 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय मांस रहित दिवस (International Meatless Day ) के तौर पर मनाता है, क्योंकि उन्होंने शाकाहारी जीवन के सार्वभौमिक अभ्यास की दृढ़ता से वकालत की थी। 
हैदराबाद सिंध में हुआ था जन्म
साधु वासवानी का जन्म हैदराबाद सिंध (पाकिस्तान) में हुआ था. उन्होंने मैट्रिक पास किया और 1899 में बम्बई विश्वविद्यालय से बी.ए. किया. उन्होंने 1902 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से एम.ए. की डिग्री भी प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने अपनी मां से अपना जीवन भगवान और मनुष्य की सेवा में समर्पित करने की अनुमति मांगी
उनकी मां चाहती थीं कि उनका बेटा जीवन में सफल हो. इसके चलते वासवानी अपने अल्मा मेटर, यूनियन अकादमी में शिक्षण कार्य करने के लिए सहमत हो गए. उनकी मां ने उनकी शादी करना चाहती थी लेकिन वासवानी ने ब्रह्मचारी बने रहने और कभी शादी नहीं करने की कसम खाई.
वासवानी ने जल्द ही कलकत्ता (अब कोलकाता) के मेट्रोपॉलिटन कॉलेज में इतिहास और दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में एक पद स्वीकार कर लिया. यहां में वासवानी अपने गुरु, प्रोमोथोलाल सेन मिले, जिन्हें नालुदा कहा जाता था.
विश्व धर्म सम्मेलन में दिया संदेश
जुलाई 1910 में, जब वासवानी 30 वर्ष के थे, तब वह और उनके गुरु प्रोमोथोलाल सेन के साथ मुंबई से बर्लिन के लिए रवाना हुए. अगस्त 1910 में, उन्होंने बर्लिन में वेल्ट कांग्रेस या विश्व धर्म कांग्रेस में भाग लिया। साधु वासवानी ने भारत के प्रतिनिधि के रूप में सम्मेलन में शांति, भारत की मदद का संदेश दिया.
वासवानी के जीवन और शिक्षण को समर्पित एक संग्रहालय, दर्शन संग्रहालय, 2011 में पुणे में खोला गया था. हर साल, साधु वासवानी मिशन, जो साधु टी.एल. वासवानी के जीवन और मिशन को आगे बढ़ाने का काम करता है, वासवानी के जन्मदिन, 25 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय मांस रहित दिवस (International Meatless Day ) के तौर पर मनाता है, क्योंकि उन्होंने शाकाहारी जीवन के सार्वभौमिक अभ्यास की दृढ़ता से वकालत की थी.
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312





