आर्यिका विज्ञानमति माताजी का London book of record ने नाम शामिल करते हुए उन्हें श्रुत सर्वाधिका की उपाधि से अलंकृत किया।
हर्षदायक सूचना प्राप्त हुई है त्याग तपस्या समता रस की मूरत समता रस की फुलवारी आर्यिका 105 विज्ञानमती माताजी का नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। जो जैन धर्म की प्रभावना में एक नया आयाम देगा।
सम्मान पत्र प्रदान करते हुए उन्हें श्रुत सर्वाधिका की उपाधि से सुशोभित करते हुए पत्र में लिखा है कि तीर्थंकर श्री ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र, प्रथम चक्रवर्ती, सम्राट भरत (जैन) के भारत में, दिगम्बर जैन वीतराग श्रमण-संस्कृति में,विश्व वंदनीय तीर्थंकर श्री वर्धमान महावीर स्वामी की पवित्र परम्परा में, चारित्र चक्रवर्ती दिगम्बराचार्य श्री शान्तिसागरजी महा-मुनीन्द्र के शिष्य आचार्य श्री शिवसागर जी मुनीन्द्र के प्रथम-शिष्य संस्कृत साहित्य के सृजेता महाकवि आचार्य श्रीज्ञानसागर जी के द्वितीय- शिष्य, महा नीतिज्ञ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनीन्द्र के गुरु भाई महा-
तपस्वी आचार्य कल्प श्री विवेक सागर जी महा-मुनिराज की पंचम शिष्या, आर्यिका श्री विशाल मती माताजी की अनुजा,
सरस्वती-सम प्रज्ञावंत, चर्या शिरोमणि, आदर्श आर्यिका श्री विज्ञानमती माताजी ने जैनागमों का अध्ययन एवं तत्त्वार्थसूत्र,
कर्म सिद्धान्त, चौबीस ठाणदि पर चिंतन-मनन कर भगवती- प्राञ्जल प्रज्ञा से 14000 प्रश्नोत्तरों का संकलन कर विश्व-
वसुन्धरा पर साहित्य के क्षेत्र में एक नवीन कीर्तिमान स्थापित किया है।


इस महनीय श्रुत-साधनार्थ आपको श्रुत संवर्धिका संज्ञा से अलंकृत कर हम सभी गौरवान्वित हो रहे हैं।
London Book OF WORLD RECORDS




संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
