सुख-दुःख कुछ नहीं, यह केवल मन का समीकरण है।”अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज
नीमच
परम पूज्य आचार्य श्री 108 अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि मन का अद्भुत रहस्य
“मन” शब्द स्वयं में चमत्कार है —
मन के आगे ‘न’ लग जाए तो बनता है नमन
मन के पीछे ‘न’ लग जाए तो बनता है मनन
यदि जीवन में मनन और नमन को आत्मसात कर लिया जाए, तो जीवन सुख, शांति और सार्थकता से परिपूर्ण हो जाता है। आज मन को शांत रखना सबसे कठिन साधना बन गया है। मन अशांत हो तो —न नींद आती है न भूख लगती है न प्यास लगती है
न किसी से मिलने-जुलने का मन करता है न जप में, न पाठ में, न मंदिर में मन लगता हैमन की अस्वस्थता शरीर को भी लाचार बना देती है।
मन की अशांति का एक बड़ा कारण — मोबाइल
पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि लगभग 75% मानसिक अशांति का कारण मोबाइल का अत्यधिक उपयोग है।
इसलिए तीन समय मोबाइल को इग्नोर करने का संकल्प लें —
1️⃣ भोजन के समय — मोबाइल को चार्जिंग पर लगा दें।
2️⃣ सोने से पहले — मोबाइल का इंटरनेट बंद कर दें।
3️⃣ शौचालय जाते समय — मोबाइल साथ लेकर न जाएँ।
फिर देखिए —
आपके सभी कार्य समय पर होंगे और जीवन में आनंद का अनुभव होगा।


🚩 भव्य मंगल पदविहार — 4 मार्च 2026, बुधवार
प्रातः 6:15 बजे
📍 The Principal Global School, कोटा-जावद रोड, नीमच (म.प्र.)
से
📍 श्री दिगम्बर जैन मांगलिक भवन, नियर पुस्तक बाजार, नीमच (म.प्र.)
(लगभग 7.5 किलोमीटर)
यह पावन पदविहार अहिंसा संस्कार पदयात्रा की दिशा —
नीमच ➝ प्रतापगढ़ ➝ घाटोल ➝ बांसवाड़ा ➝ परतापुर (अद्वेश्वर पार्श्वनाथ, राजस्थान) की ओर अग्रसर है।



सभी श्रद्धालुजन अधिकाधिक संख्या में पधारकर धर्मलाभ लें एवं गुरुचरणों का आशीर्वाद प्राप्त करें।
जानकारी स्रोत: नरेंद्र अजमेरा, पियूष कासलीवाल
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
📞 9929747312
