होली रंगों का पर्व ही है लेकिन अगर यही रंग केमिकल के ना होकर गुलाल के हों तो होली का मज़ा दोगुना हो सकता है।

धर्म

होली आ गयी है और रंगों की बौछार भी होने लगी है।

ऐसे में बहुत से‌ नवयुवक होली पर मस्ती करते हुए अथाह जल को व्यर्थ ही बर्बाद कर देते हैं। हालांकि होली रंगों का पर्व ही है लेकिन अगर यही रंग केमिकल के ना होकर गुलाल के हों तो होली का मज़ा दोगुना हो सकता है। इसी तरह के संदेशों को लेकर देश की पहली महिला राइस आर्टिस्ट जयपुर की नीरू छाबड़ा अक्षत को शब्दों से रंग कर होली पर जल बचाने व गुलाल के साथ होली खेलने के लिए प्रोत्साहित व जागरूक कर रही हैं।

 

अपने इन संदेशों में वह ‘गुलाल होली प्यार की होली ‘ , ‘प्यार के रंग , गुलाल के संग’, ‘जल अनमोल है, व्यर्थ ना बहाओ’, जैसे नारों के साथ अपनी कला को अभिव्यक्ति का रंग देकर इस त्यौहार को मनाने की अपील कर रही हैं।।।

विदित हो कि राइस आर्टिस्ट नीरू छाबड़ा समय – समय पर आने वाले त्यौहारों और राष्ट्रीय दिवसों पर अपनी कला के इस मंच से युवा पीढ़ी को कुछ अच्छा करने के लिये प्रेरित करती रहती हैं और चालीस वर्षों की कला की अथक साधना से देश और विदेश के हर आम और खास को प्रभावित कर रही हैं।

 

स्वाती जैन

हैदराबाद

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