संपत्ति से नहीं, संयम से महानता आती है” – विदिशा में गूंजा संभवसागर महाराज का प्रेरक संदेश

धर्म

“संपत्ति से नहीं, संयम से महानता आती है” – विदिशा में गूंजा संभवसागर महाराज का प्रेरक संदेश

विदिशा।

श्री शांतिनाथ जिनालय (स्टेशन जैन मंदिर) में आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 संभवसागर महाराज ने आत्मोन्नति और वैराग्य पर केंद्रित अत्यंत प्रभावशाली प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की सच्ची महानता बाहरी संपत्ति या वैभव से नहीं, बल्कि संयम और विनम्रता से प्रकट होती है।

 

🔶 “वैभव पर नहीं, विनम्रता पर करें गर्व”

मुनिश्री ने स्पष्ट कहा कि संसार का सुख क्षणिक है, जबकि आत्मा का आनंद शाश्वत और अनंत है।“आज जब पुण्य के प्रभाव से हमें थोड़ी-सी संपत्ति, पद या मान-सम्मान मिलता है, तो हम दूसरों को छोटा दिखाने लगते हैं। जिस वैभव पर हमें विनम्र होना चाहिए, उसी पर हम अहंकार करने लगते हैं,” उन्होंने कहा।उन्होंने श्रद्धालुओं को स्मरण कराया—“संपत्ति से नहीं, संयम से महानता आती है;वैभव से नहीं, विनम्रता से ऊँचाई मिलती है।”

🔱 भरत चक्रवर्ती का उदाहरण: वैभव के मध्य भी वैराग्य

अपने उद्बोधन में मुनिश्री ने भरत चक्रवर्ती का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भरत चक्रवर्ती के पास अपार वैभव था—स्वर्ण-रजत से दमकते महल, असीम राज्य और अद्भुत ऐश्वर्य। पौराणिक वर्णनों के अनुसार उनकी 96,000 रानियाँ थीं—

32,000 म्लेच्छ खंड की राजकुमारियाँ

32,000 मुकुटबद्ध राजाओं की पुत्रियाँ

32,000 विद्याधर राजाओं की कन्याएँ

इतने असाधारण वैभव के बावजूद उन्हें वास्तविक सुख का अनुभव नहीं हुआ, क्योंकि उनके भीतर वैराग्य की ज्योति प्रज्वलित थी।

मुनिश्री ने कहा, “यदि भरत चक्रवर्ती जैसे सम्राट वैराग्य की ओर मुड़ सकते हैं, तो हम अपने जीवन का आत्मोद्धार क्यों नहीं कर सकते?” उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन का आह्वान किया।

🔸 मंचासीन रहे संतगण

धर्मसभा में मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज एवं मुनि श्री संस्कार सागर महाराज भी मंचासीन रहे। सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।

📍 बड़े बाबा आदिनाथ की नई वेदी पर प्रतिष्ठा की तैयारी

सकल दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने जानकारी दी कि आगामी मार्च माह के द्वितीय सप्ताह में “वर्रो वाले बड़े बाबा” भगवान आदिनाथ को नवीन मंदिर में नई वेदी पर विराजमान कराने की तैयारी चल रही है।

इस संबंध में शीतलविहार न्यास का प्रतिनिधिमंडल मुक्तागिरी तीर्थ में विराजमान आचार्य श्री समयसागर महाराज से आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचा। आचार्यश्री ने संपूर्ण कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभवसागर महाराज को सौंपते हुए अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

🕘 प्रतिदिन प्रातः प्रवचन

मुनि संघ के प्रतिदिन प्रातः 8:45 बजे से प्रवचन आयोजित हो रहे हैं, जिनमें श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित होकर आध्यात्मिक ऊर्जा और मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं।

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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