संयम और आचरण से ही संभव है कल्याणः योगसागर महाराज निरोग सागर महाराज ने फास्ट फूड को हानिकारक बताया
बिजौलिया
मनुष्य आज धर्म की सही परिभाषा को समझने के बजाय बाहरी प्रदर्शन में उलझा हुआ है, जिससे उसका वास्तविक कल्याण संभव नहीं है।
संयम के मार्ग को जीवन में उतारना और उसके लिए संकल्पित होना अत्यंत आवश्यक है। यह विचार ज्येष्ठ निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108योग सागर महाराज ने बुधवार को प दिगंबर जैन पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ क्षेत्र में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि केवल आडंबर से धर्म सिद्ध नहीं होता, बल्कि आचरण और संयम ही सच्चा धर्म है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से जीवन में संयम को अपनाने का आह्वान किया।

मुनिश्री 108निरोग सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को अपने आवश्यक कर्मों को प्राथमिकता से करना चाहिए, तभी वह धर्म मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।उन्होंने वर्तमान समय में युवा पीढ़ी के फास्ट फूड की ओर बढ़ते रुझान को स्वास्थ्य और धार्मिक दृष्टि से हानिकारक बताया।

प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने आचार्य विद्यासागर का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके परिवार ने मोक्ष मार्ग को अपनाकर आदर्श प्रस्तुत किया है, जो समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है। 


जैतला गांव के श्रावक लादूलाल धनोपिया, जो 26 फरवरी को पदमपुरा में आचार्य वर्धमान सागर महाराज से दीक्षा लेकर संयम मार्ग पर अग्रसर होंगे, उनका बिजौलिया तीर्थ क्षेत्र कमेटी द्वारा स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर बिजौलिया सकल दिगंबर जैन समाज, आवा दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी तथा निंबाहेड़ा सकल दिगंबर जैन समाज ने भी मुनिश्री से बिजौलिया गांव में मंगल प्रवेश का निवेदन किया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धाल उपस्थित रहे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
