पंच कल्याणक मेला ओर मनोरंजन स्थल नहीं हैं इससे धर्म के भाव , अच्छे परिणाम संस्कार प्राप्त कर मनुष्य जीवन सार्थक करेआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

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पंच कल्याणक मेला ओर मनोरंजन स्थल नहीं हैं इससे धर्म के भाव , अच्छे परिणाम संस्कार प्राप्त कर मनुष्य जीवन सार्थक करेआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

पदमपुरा पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी गणिनी आर्यिका 105श्री सरस्वती मति माताजी गणिनी आर्यिका105 श्री स्वस्तीभूषण माताजी संघ कुल 42 साधुओं के संघ सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव विभिन्न कार्यक्रमों के साथ गरिमामय सानंद संपन्न हुआ। एडवोकेटसुधीर अध्यक्ष, हेमंत सोगानी मंत्री ,राजकुमार कोठारी कोषाध्यक्ष ने बताया कि 22 फरवरी रविवार को प्रात श्रीजी का अभिषेक पूजन के बाद श्री ऋषभदेव महामुनिराज को केवलज्ञान के बाद प्रात निर्वाण मोक्ष हुआ। मोक्ष कल्याणक के बाद अग्नि कुमार देव द्वारा सत्कार विधि ,दीक्षार्थी श्री मुन्नालाल जी की दीक्षा,125 फिट के नव निर्मित शिखर पर कलश ओर ध्वज का आरोहण ,111 फिट की धर्म ध्वजा की स्थापना, नूतन चौबीसी पर अभिषेक हुआ श्री सुरेश सबलावत ने बताया कि धर्म सभा में सुप्रसिद्ध भामाशाह श्रेष्ठि अशोक पाटनी,श्रीमती सुशीला पाटनी,आर के मार्बल किशनगढ़, श्री राजेंद्र कटारिया,श्री राजेश शाह ने भगवान श्री पदम प्रभ ओर प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के चित्रों का अनावरण ,दीप प्रवज्जलन कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। इस अवसर पर धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गर्भकल्याणक से प्रारंभ हुई आज भगवान को मोक्ष हो गया तीर्थंकर भगवान भी हमारे ही तरह संसारी प्राणी की भांति गर्भ में आते हैं ,जन्म लेते हैं, राज्य का संचालन भी करते हैं और निमित पाकर वैराग्य संयम धारण कर आत्मा पर लगे कर्मों को तप ,ध्यान रूपी अग्नि से भस्मीभूत नष्ट कर गुण स्थान में बढ़ते हुए केवल ज्ञान प्राप्त कर शेष 85 कर्म प्रकृति नष्ट कर 14 गुण स्थान से सिद्ध हो जाते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मोक्ष कल्याणक के अवसर पर श्री आदिनाथ भगवान सहित सभी 24 तीर्थंकरों के निर्वाण पर प्रगट किये गुरु भक्त राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि आज बालब्रह्मचारी श्री मल्लीनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस है। पूज्य होने से पूज्यता को प्राप्त होते है। 70 से 100 की उम्र होने पर भी वैराग्य के भाव परिणाम नहीं होते हैं। पंच कल्याणक मेला , या मनोरंजन स्थल नहीं हैं जीवन में परिवर्तन लाने से ,जीवन धर्ममय होने से जीवन सार्थक होगा। सुरेश सबलवात के अनुसार भगवान के मोक्ष कल्याणक के बाद अग्नि कुमार देव द्वारा सत्कार विधि ,दीक्षार्थी श्री मुन्नालाल जी की दीक्षा,125 फिट के नव निर्मित शिखर पर कलश ओर ध्वज का आरोहण देश के प्रसिद्ध भामाशाह श्रेष्ठि अशोक,श्री सुरेश ,श्री विमल श्रीमती सुशीला,श्रीमती शांता,श्रीमति तारिका पाटनी आर के मार्बल किशनगढ़ ने किया।111 फिट की धर्म ध्वजा की स्थापना श्री ताराचंद जैन पोल्याका श्री सुनील,श्रीमती नीलम परिवार ने की। श्री जी की रथ यात्रा के बाद नूतन चौबीसी पर पुण्यार्जक परिवारों ने प्रतिमाएं विराजित की।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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