पार्श्वनाथ तीर्थ स्थल पर नववर्ष से पूर्व ही भक्तों के आगमन से होने लगा गुलजार
पारसनाथ
तीर्थ स्थल पारसनाथ सम्मेद शिखर जी की यात्रा व वंदना के भाव लिए भक्त यहां साल भर आते हैं। लेकिन साल के अंतिम माह दिसंबर व जनवरी के समय यह स्थान भक्तों से गुलजार रहता है। जहां दिसंबर माह के शुरू होते ही झारखंड बिहार व बंगाल के विभिन्न जिलों से स्कूली बच्चों के साथ-साथ पर्यटकों का आना भी शुरू हो जाता है।
पारसनाथ पर्वत जो कई पर्वतों की श्रृंखला है इसकी हरी भरी मनोरम वादियों का दृश्य पर्यटकों को भी खूब लुभाता है तभी तो यहां आए दिन हजारों की संख्या में पर्यटक दिसंबर व जनवरी महीने में सर्दी होने के बावजूद आते है, और यहां सैलाब देखते बनता है। और यहां के धार्मिक एवं पौराणिक इतिहास से भी लोग वाकिफ होते हैं।

यहां आकर सभी जन अपने आप में अभिभूत हो जाते है। कभी-कभी पहाड़ की वंदना करते हुए दिखाई पड़ते हैं और वनों को देख प्रफुल्लित हो जाते हैं। पारसनाथ पर्वत के मार्ग में आने वाले सीता नाला व गंधर्व नाला की कल कल धारा शीतलता का एहसास कराती है एवं इस धारा में कई भक्त स्नान आदि भी करते हैं।। इसकी भव्यता इतनी है की लोग से अपने कमरे में मोबाइल में कैद करने से नहीं रोक पाते। बताया जाता है कि सीता नाला एवं गंधर्वनाला का इतिहास रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है।
2000 वर्ष पुराना मंदिर आज भी संरक्षित है
पारसनाथ पर्वत के अंतिम छोर पर 25 से भी ज्यादा जैन मंदिर हैं इसके समीप का दृश्य मन को लुभाता है सर्दी के मौसम में घने कोहरे के बीच संगमरमर के बिल्कुल सफेद पर्वत से निर्मित मंदिरों के शिखर पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी से पर्वत का नजारा और मनमोहक हो जाता है। 23वें तीर्थंकर पारसनाथ भगवान के नाम पर इस पहाड़ी का नाम पारसनाथ रखा गया है। बीस तीर्थंकर ने इस पहाड़ी पर मोक्ष प्राप्त किया है। उन में से प्रत्येक के लिए पहाड़ी पर एक टॉक स्थित है यहां तक की पहाड़ी पर कुछ मंदिर हैं जो 2000 साल से अधिक पुराने माने जाते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
