अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में पंचकल्याणक की तैयारी अंतिम चरण में,आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में 18 से 22 फरवरी तक होगा पंचकल्याणक महोत्सव
पदमपुरा पदमपुरा(जयपुर) दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरामेंआगामी 18 फरवरी से 22 फरवरी तक नवीन खड़गासन चौबीसी जिन प्रतिमाओं के पंचकल्याणक एवं नव निर्मित शिखर पर कलश एवं ध्वजा का आरोहण का भव्य महा-महोत्सव वात्सल्य वारिधि आचार्य 108 श्री वर्धमानसागर जी तथा गणिनी आर्यिका 105 श्री सरस्वती माताजी एवं गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी के पावन सानिध्य में होगा पदमपुरा प्रबंध समिति एवं पंच कल्याणक समिति के श्री सुधीरजैन ,श्री हेमंत सोगानी ने बताया कि विगत दिनों आचार्य श्री वर्धमान सागर द्वारा नूतन प्रतिमाओं का अवलोकन किया गया। पंच कल्याणक में प्रमुख का चयन हो गया हैं। प्रचार संयोजक सुरेश सबलावत अनुसार पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में नूतन शिखर पर कलश एवं ध्वजा आरोहण आरके मार्बल ग्रुप के भामाशाह अशोक, श्रीमती सुशीला , सुरेश श्रीमती शांता एवं विमल तारीका पाटनी किशनगढ़ द्वारा किया जाएगा ।111 फीट की धर्म ध्वजा राजेंद्र ,सुमन छाबड़ा गुवाहाटी एवं सरोज सरिता बगड़ा सेलम द्वारा प्रदान की गई है।श्री राजकुमार कोठारी अनुसार सन 1980 में आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी की प्रेरणा से मूल नायक श्री पदमप्रभ भगवान की 27 फीट की खड्गासन प्रतिमा राजकुमार रामचंद्र कोठारी परिवार की ओर से विराजित की गई थी। प्रथम तीर्थंकरश्री आदिनाथ से अंतिम 24वे तीर्थकर श्री महावीर स्वामी की नूतन प्रतिमा के पुण्यशाली क्रमशः राजकुमार पाटनी, रमेशचंद, छिगनलाल काला, स्वरूपचंद गंगवाल ,ज्ञानचंद झांझरी, नरेंद्र काला निवाई,महावीर पहाड़िया, एडवोकेट सुधीर ,रमेश गंगवाल ,देवेंद्रमोहन ,विकास, जैन डॉक्टर साधना, लल्लूलाल बेनाडा, गोविंद, पारितोष, नंदकिशोर पहाड़िया, संजय पांड्या,हेमंत सोगानी, प्रेमचंद छाबड़ा, अनिल गंगवाल, सुभाष झांझरी, भागचंद बोहरा, तारादेवी सरावगी एवं ब्रह्मचारिणी मुन्नी दीदी हैं ।कमेटी द्वारा राजस्थान शासन के महत्वपूर्ण राजनीतिक पदाधिकारी,प्रशासनिक अधिकारियों एवं देश भर के समाज जनों श्रेष्ठी वर्ग को परम संरक्षक,संरक्षक ,और अतिथि के रूप में मनोनीत किया है।राजेश पंचोलिया एवं विनोद अनुसार पंच कल्याणक में 18 फरवरी को गर्भ कल्याणक, 19 को जन्म, 20 को दीक्षा, तप, 21 को केवलज्ञान तथा 22 फरवरी को मोक्षकल्याणक होगा। 22 फरवरी को वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा सिद्ध हस्त कर कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा होगी
