बेटियों का जीवन संवारने के लिए पहल बागेश्वर धाम में आज कन्याओं का सामूहिक विवाह 7 बेटियां अनाथ, कई के माता-पिता दिव्यांग, बागेश्वर धाम में सम्मेलन से शादी की चिंता दूर
छतरपुर
बागेश्वर धाम में चल रहे सामूहिक विवाह सम्मेलन के तहत महाशिवरात्रि पर रविवार को 305 कन्याओं का सामूहिक विवाह हो रहा है। इसमें बगैर माता-पिता के 7, बगैर पिता की 138 और बगैर माता की 28 कन्याओं के विवाह होंगे। इसके अलावा 8 दिव्यांग बेटियों और 39 बेहद गरीब के परिवार की बेटियों का विवाह भी की हो रहा है। इन गरीब बेटियों के परिजन जहां विवाह की चिंता से चिंतित थे वहीं अब बागेश्वर धाम विवाह सम्मेलन में चयन होने से उनकी क्षा विवाह से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो गई हैं।
विवाह सम्मेलन में बारात के स्वागत, दोनों पक्षों के भोजन से लेकर नवदंपतियों को उपहार सामग्री तक सभी खर्च बागेश्वर धाम सेवा समिति उठा रही है। सम्मेलन के लिए समिति के पास आवेदनों में कन्याओं का चयन गरीबी के आधार पर किया गया है। जिन बच्चियों के अभिभावकों की माली हालत खराब भी उन्हीं को चयन में प्राथमिकता दी गई है। दानदाताओं के सहयोग से सभी कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

मां-पिता दिव्यांग, सब्जियां उगाकर गुजारा
छतरपुर जनपद पंचायत के तहत पिड़पा गांव की रहने वाली देवकुंवर कुशवाहा का विवाह भी बागेश्वर धाम से हो रहा है। शुक्रवार और शनिवार को घर में विवाह की रस्मों का आयोजन किया गया। बेटी के पिता रामा कुशवाहा और मां दोनों पैरों से दिव्यांग है। वे ट्राईसाइकल से चलते हैं। उनके पास आधा एकड़ से भी कम जमीन है। दिव्यांग होने के कारण लोग मजदूरी का काम भी नहीं देते, इस कारण वे अपने खेत में सब्जियां उगाकर ही भरण पोषण कर रहे हैं। रामा बताते हैं कि यदि बागेश्वर धाम सम्मेलन चयन नहीं होता तो वे बेटी का विवाह ही नहीं कर पाते। सम्मेलन में विवाह होने से उनके परिवार का सारा बोझ कम हो गया है।




कच्चा घर और कमाने वाला भी कोई नहीं
महाराजपुर की ममता वंशकार का विवाह भी सम्मेलन से किया जा रहा है। ममता के माता और पिता दोनों का निधन हो चुका है। ममता अपनी दादी के साथ एक छोटे कच्चे घर में रहती हैं। परिवार में कोई कमाने वाले जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है। ऐसे में ममता के विवाह का खर्च परिवार के लिए बहुत बड़ा बोझ था। अब बागेश्वर धाम में विवाह होने से सभी समस्याएं दूर हो गई हैं। इसके लिए परिवार के सभी सदस्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अभियान की सराहना कर रहे हैं।
पिता का निधन, मां करती हैं मजदूरी हर जोड़े के लिए 45 उपहार
महाराजपुर में रहने वाली चंचल चौरसिया का विवाह भी सम्मेलन से होने जा रहा है। चंचल के पिता का वर्ष 2024 में निधन हो गया था। मां रूपा चौरसिया का कहना है कि उनकी चार बेटियां हैं। दो का पहले विवाह हो गया है। पति की मौत के बाद परिवार की माली हालत बहुत खराब हो गई है। वे मजदूरी करके बेटियों का पालन का रहीं हैं। बेटियों के विवाह की बहुत चिंता थी। पर अब बागेश्वर धाम विवाह सम्मेलन में बेटी के विवाह चयन होने से बहुत बड़ी समस्या हल हो गई है। बेटी का धूमधाम से विवाह हो रहा है। उपहार भी दिए जा रहे हैं। विवाह का कोई बोझ उनके ऊपर नहीं है। बेटी का ऐसा विवाह पति के रहते हुए भी नहीं कर पाते।
मीरा के माता-पिता नहीं, मजदूरी की
छतरपुर जिले के परसनियां गांव की रहने वाली मीरा अहिरवार अनाथ हैं। 6 साल पहले मीरा के माता पिता का निधन हो गया था। मीरा की चार बहनें और तीन भाई हैं। दो बेटियों की शादी माता पिता के सामने ही हो गई थी। मीरा खुद मजदूरी करके अपने छोटे भाई बहनों का लालन पालन कर रही है। रिश्तेदारों ने मीरा के लिए एक वर ढूंढा। फिर बागेश्वर धाम में सम्मेलन से विवाह के लिए आर्वेदेन किया। चयन की प्रक्रिया के बाद अब मीरा का विवाह सम्मेलन में धूमधाम से होने जा रहा है।
बेटियों को उपहार के रूप में श्री बालमुकुंद भगवान का विग्रह, बालाजी सरकार का विग्रह, श्री रामचरितमानस, वस्त्र, श्री बागेश्वर धाम कैलेंडर, गाय बछड़ा दिए जाएंगे इसके अलावा अन्य सामग्री में मंगलसूत्र, पायल, बिछिया, नाक की कील, कान की बाली टॉप्स, 7 साड़ियों का सेट, चांदी का सिक्का श्रीफल चांदी कवर सहित, श्रृंगार दानी, चूड़ी सेट, डबल बेड, सोफा, ड्रेसिंग टेबल, अलमारी, गद्दे तकिया कवर सहित, बेडशीट, कंबल, ट्रॉली बैग, कलर एलईडी टीवी, सिलाई मशीन, सीलिंग फैन, वॉटर हिटर, इलेक्ट्रिक प्रेस, दीवाल घड़ी, गैस सिलेंडर, गैस चूल्हा, बर्तन सेट, प्रेशर कुकर, कलश स्टील, टिपारा, सूपा, खिचड़ी, बेला कांसा, मिक्सर ग्राइंडर, पानी का थर्मस, स्टील जग, लेडीज पर्स, रोल गोल्ड अंगूठी, अल्युमिनियम का मग्गा शामिल है। वधु को लहंगा चुनरी, सैंडल एवं वर के लिए शेरवानी टोपी और जयमाल दिए जा चुके हैं। इस बार 30 हजार की एफडी की जा रही है जो वर और वधू के संयुक्त नाम से होगी।
