शीतलधाम में समवसरण मंदिर की मुख्य बेदी का शिलान्यास एवं 100 फिट ऊपर डोम पर शिखर का शिलान्यास संपन्न
विदिशा ः
1008 भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी के समवसरण का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है,रविवार को मुख्य बेदी का एवं 100 फिट की ऊंचाई पर डोम के ऊपर शिखर बनाने के लिये शिलान्यास विदिशा नगर में विराजमान संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य एवं विद्या शिरोमणि आचार्य समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर,मुनि श्री निस्सीम सागर,मुनि श्री संस्कार सागर स संघ सानिध्य में बाल ब्र.तरुण भैया इंदौर के निर्देशन में मुम्वई निवासी धर्मानुरागी गुरुभक्त परिवार श्री प्रशांत जैन,श्रीमती दिव्या जैन के कर कमलों से मध्यप्रदेश शासन के पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया एवं श्री मति सुधा मलैया परिवार के द्वारा संपन्न हुआ
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मंच से घोषणा की गई कि उपरोक्त बेदी एवं शिखर का कार्य लगभग चार माह में पूर्ण हो जायेगा।इस अवसर मुनि श्री के आशीर्वाद से शीतलविहार न्यास टृस्ट के कयी नये टृस्टी सदस्य बने उन सभी का स्वागत शीतलविहार न्यास के अध्यक्ष सचिन बसंत जैन मंत्री मोहन जैन नमकीन कोषाध्यक्ष राजेश जैन एवं उपाध्यक्ष संजय भंडारी, रविन्द्र जैन एवं टृस्टीओं ने किया इस अवसर मुनि श्री ने 18 वर्ष पूर्व की स्मृतियों को ताजा करते हुये कहा कि जब 2008 में गुरुदेव के साथ इतना विशाल समवसरण जो आसमान में अपनी ऊंचाइयों को छू रहा है,एवं पूर्ण होंने को है,इस विशाल समवसरण मंदिर का शिलान्यास किया था,और आज वह इतनी अधिक ऊंचाइयों को छू रहा है

मुनि श्री ने कहा कि कल जब अंतिम छत्र स्थापित करने ऊपर गये तो ऐसी मनोहारी कारीगरी का दृश्य था कि लगा कि हम साक्षात आरिहंत भगवान के समवसरण में ही प्रवेश कर रहे हों फिर पहली मंजिल दूसरी मंजिल तथा तीसरी मंजिल से होते हुये जब 100 फिट ऊपर डोम पर पहुंचे तो वंहा से जब विदिशा को देखा तो लगा कि विदिशा बहूत छोटा हो गया है उस समवसरण के सामने मुनि श्री ने कहा कि हमने बहूत से स्थान पर मंदिर के ऊपर की चाबी ( छत्र) रखवाई है लेकिन वह एक पीस में हुआ करती थी लेकिन भगवान शीतलनाथ स्वामी के समवसरण का मंदिर इतना विशाल है,कि कोई भी क्रैन एक पत्थर को वंहा नहीं ले जा सकती तो वंहा पर आर्किटेक्ट ने चार पत्थरों का शिल्पांकन किया जिसमें एक पत्थर का वजन नौ टन था जिसे चार दिन के स्थान पर तीन दिनों में यह कार्य पूर्ण कर लिया उन्होंने उन समस्त कारीगरों को आशीर्वाद देते हुये कहा कि इस समवसरण को बनाने में न जाने कितने लोगों का धन लगा होगा धन लगाने वाले तो धन लगाते है लेकिन कल जब हमने उन कारीगरों की कारीगरी देखी तो लगा मंदिर दान से नहीं बल्कि उन कारीगर तथा मजदूरों का पसीना लगा है मंदिर बनाने वाले सच्चे सेबक तो वही है,उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पत्थर का कार्य करना कोई सहज नहीं हैं, बिना समर्पण के कोई कार्य नहीं होता जरा सी चूक बहूत बड़ी समस्या को खड़ी कर सकती थी

लेकिन सभी इंजीनियर आर्कीटेक्ट और कारीगरों ने सावधानी और समर्पण तथा धैर्य से अपने कार्य को पूर्ण संपादित किया जिससे आज हम सभी लोग विशिष्ट मुहुर्त में भगवान शीतलनाथ स्वामी के चार कल्याणकों से सुशोभित भद्दिलपुर भेलसा में यह कार्य संपन्न हुआ मुनि श्री ने कहा कि आज से लाखों लाखों वर्ष पूर्व जब भगवान शीतलनाथ स्वामी को इसी धरती पर केवलज्ञान हुआ तो सौधर्म इंद्र ने कुबेर को समवसरण लगाने का आदेश दिया और तत्क्षण कुबेर ने वह समवसरण की रचना कर दी जो साड़े सात योजन का था (अर्थात 75 कि. मी वर्गाकार ऐरिया) जिसमें सभी 12 सभाओं में असंख्यात देवी देवताओं के साथ असंख्यात जीव विराजमान होते थे
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मुनि श्री ने कहा कि आज लाखों वर्षों के पश्चात इतिहास आचार्य गुरुदेव के आशीर्वाद से पुनः दौहरा रहा है।उन्होंने विदिशा नगर के सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुये कहा कि सभी घरों और परिवार के सदस्यों को मुख्य बेदी पर एक शिलाअवश्य स्थापित करना चाहिये।जिससे हजारों हजार वर्ष तक आपके परिवार को समवसरण का यह आशीर्वाद प्राप्त होता रहे। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया इसअवसर पर सकल दि. जैन समाज के समस्त पदाधिकारी और हजारों की संख्या में भक्त धर्म श्रदालु उपस्थित थे।
