संयम धारण करने हेतु थोडा भी निमित्त मिल जाये तो कल्याण हो सकता है- उपाध्याय विहसन्तसागर जी महाराज
आगरा, दि.27/07/24
, प्रात: कालीन प्रवचन सभा मे बोलते हुये उपाध्याय विहसन्तसागर जी ने कहा कि जैसे डूबते को तिनके का सहारा होता है, वैसे ही कोई संयम धारण करने का निमित्त मिल जाये तो भव से पार करा देता है!
उन्होने एक जीवन्त किस्सा सुनाते हुए बताया कि कैसे करगुंआ

झांसी मे एक स्वाध्याय शील बाबाजी कहने को मुनियों मे श्रद्धा नहीं थी, परन्तु बिमारी आने पर जब महाराज जी ने उन्हें सम्बोधन दीया, तो वही बाबाजी ने अंतत: उन्हीं महाराज जी से जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर सल्लेखना पूर्वक समाधीमरण लीया! उन्होने कहा का न जाने किस भेष मे राम आ जायें, अत: त्यागीयो को सन्तपुरुषों का महात्माओं का कभी निरादर न करें!
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
