खनियांधाना में पंचकल्याणक महोत्सवः भक्ति, वैराग्य और त्याग का दिव्य संगम
मुहारीकला
खनियांधाना में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा और त्रयगजरथ महोत्सव का शनिवार आध्यात्मिक भक्ति, त्याग और समर्पण का अद्भुत दृश्य बन गया। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज और मुनिश्री निरापद सागर जी महाराज के सानिध्य में सजी अयोध्या नगरी में हजारों श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा में डूबे रहे।
सुबह नित्य पूजन के बाद विशाल पांडाल में मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन दिया। उन्होंने जीवन के मंगल-अमंगल, मन-वचन-कर्म की पवित्रता और संयम के महत्व पर बात रखी। कहा, भावों की शुद्धि के बिना बाहरी वैभव व्यर्थ है। तप, त्याग और संयम ही आत्मोन्नति का मार्ग हैं। महाराजा नाभिराय के आंगन में बालक तीर्थंकर की भव्य बारात निकली। श्रद्धालु इंद्र-इंद्राणी के साथ बैंड-बाजों की धुन पर थिरकते नजर आए। सत्येंद्र शर्मा एंड पार्टी केभक्तिगीतों ने माहौल को धर्मरस से भर दिया। दिन का सबसे भावुक क्षण तप कल्याणक रहा। बालक तीर्थंकर ने राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य मार्ग अपनाया। पूरा पांडाल ‘वैराग्य की जय’ के जयघोष से गूंज उठा। कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। दोपहर में मुनि 108 निरापद सागर जी महाराज का पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में हुआ। नवीन पिच्छिका अर्पण का सौभाग्य भगवान के माता-पिता बनेकैलाश चंद दादाजी जैन और उनके परिवार को मिला। पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का पुण्य लाभ गोलाकोट पंचकल्याणक के भगवान माता-पिता बने ऋषभजैन (बामौरकलां) और उनके परिवार को मिला।



सभी अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के निर्देशन में शास्त्रोक्त विधि से हो रहे हैं। मीडिया प्रभारी संजीव जैन चौधरी ने बताया, खनियाधाना में उमड़ा जनसैलाब गुरु भक्ति और समाज की एकता का प्रतीक है।


संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
