आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 10 वर्षों के बाद दिगम्बर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र पदमपुरा रत्नत्रय के प्रतीक चौथी बार प्रवेश
पदमपुरा 32 साधुओं के साथ हो रहा हैं इसके पूर्व सन 1980 में मुनि अवस्था में चातुर्मास किया था। वर्ष 2016 में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा में सूरी मंत्र आपके द्वारा दिए गए। अब तीसरी बार 8 फरवरी को मंगल प्रवेश संभावित है पदमपुरा कमेटी निरंतर आपके संपर्क में होकर मार्गदर्शन ले रही हैं। आपके प्रमुख निर्देशन में नूतन चौबीसी की पंच कल्याणक प्रतिष्ठा आगामी 18 फरवरी से 22 फरवरी तक होगी ।इसमें आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी का पदार्पण हो गया हैं। अन्य साधुओं की भी आने की संभावना हैं आपके संघस्थ कुल 32संयमी महात्माओं में सभी उम्र के साधु विद्यमान हैं जहां न्यूनतम आयु 29 वर्षीय आर्यिका श्री पद्मयश मति एवम आर्यिका श्री दिव्ययश मति माताजी हैं वहीं मुनि श्री चिंतन सागर जी 39 वर्षीय युवा मुनि है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 76 वर्षीय होकर संयमी जीवन 57 वर्ष ओर आचार्य पद पर 36 वर्ष हो गए हैं।मुनियों में मुनि श्री प्रभव सागर जी 81 वर्षीय हैं । सभी साधुओं का संक्षिप्त परिचय
1 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी जन्म सनावद 18 सितंबर 1950 दीक्षा तिथि 24 फरवरी 1969 आचार्य पद 24 जून 1990लौकिक शिक्षा बी ए । क्रमांक 11, 12, तथा क्रमांक 25 छोड़कर शेष सभी साधु आप से दीक्षित हैं।2 मुनि श्री हितेंद्रसागर जी जन्म बोली जयपुर जन्म 7 फरवरी 1977 मुनि दीक्षा 9 अक्टूबर 2008 एम कॉम। आपके पिता ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री भुवन सागर जी हैं 3 मुनि श्री प्रभवसागर जी जयपुर जन्म 19 फरवरी 1944 हायर सेकेंडरी 81 वर्ष में संयमी जीवन 10 वर्ष। भाई ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री सहिष्णु सागर जी थे।4 मुनि श्री चिंतनसागर जी मुंबई जन्म 4 जून 1986 मुनि दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा एम काम सी ए फाउंडेशन 39 वर्ष में संयमी जीवन 9 वर्ष।5मुनिश्री दर्शितसागर जी बड़वाह mp जन्म 4 जुलाई 1955 शिक्षा हाय स्कूल, 70 वर्ष में संयमी जीवन 9 वर्ष। पत्नी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री दर्शनामति हैं 6 मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी उदयपुर जन्म 20 नवंबर 1954 शिक्षा बीकॉम, 71 वर्षीय में 3 वर्ष संयमी जीवन पत्नी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री प्रणतमति हैं 7मुनि श्री मुमुक्षुसागर जी धरियावद प्रतापगढ़ जन्म 5 मई 1955 मुनि दीक्षा 13 फरवरी 2023 शिक्षा हायर सेकेंडरी ,70 वर्षीय में 2 वर्ष संयमी जीवन8 मुनि श्री प्रणीत सागर मुंबई जन्म 8 अक्टूबर 1953 मुनि दीक्षा 6 सितंबर 2024 शिक्षा इंजीनियर, 72 वर्षीय में 1 वर्ष का संयमी जीवन। माता ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री मूर्ति मति थी।9 मुनिश्री ध्येय सागर जी मेड़ता सिटी जन्म 13 सितंबर 1863 मुनि दीक्षा 20 अप्रैल 2025, एक वर्ष का संयमी जीवन।माता ने भी दीक्षा ली थी शिक्षा स्नातक 10मुनि श्री भुवन सागर जी जयपुर जन्म 15 अगस्त 1950 मुनि दीक्षा 20 अप्रैल 2025 शिक्षा बी कॉम एक वर्ष का संयमी जीवन।पुत्र भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री हितेंद्र सागर जी हैं 11आर्यिका श्री शुभमति जी खुरई का जन्म सन 1948 में हुआआचार्य श्री धर्म सागर जी से आर्यिका दीक्षा 5 नवंबर 1971 को हुई। शिक्षा 9 वी है ।12,आ श्री चैत्यमती जी जन्म केजड़ राजस्थान सन 1953 दीक्षा गुरु आचार्य श्री अजीत सागर जी से सन 1988 शिक्षा 5 वी 13आ श्री विलोकमति जी सलूंबर जन्म 31 जनवरी 1961 आर्यिका दीक्षा 15 फरवरी 1997 शिक्षा 5 वी 14आ श्री दिव्यांशुमति जी बांसवाड़ा जन्म 5 मई 1947 आर्यिका दीक्षा 18 नवंबर 2010 शिक्षा बी ए पॉलिटेक्निक साइंस माता पिता भी साधु15आ श्री पूर्णिमामति जी , निवाई जन्म 17 अक्टूबर 1978 आर्यिका दीक्षा 1 फरवरी 2013 शिक्षा हायर सेकेंडरी16आ श्री मुदितमति जी पारसोला उदयपुर जन्म सन 1938 आर्यिका दीक्षा 20 फरवरी 2015 शिक्षा 5 वी 17आ श्री विचक्षणमति जी जोबनेर जन्म 29 नवंबर 1963 आर्यिका दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा मेट्रिक विशेष पति माता ओर सास ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा ली।18आ श्री समर्पितमति जी , उदयपुर जन्म 23 मार्च 1963 आर्यिका दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा बी ए ।विशेष माता ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा ली थी।19आ श्री निर्मुक्तमति जी किशनगढ़ जन्म 15 अगस्त 1958 दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा 11 वी 20आ श्री विनम्रमति जी महाराष्ट्र जन्म 1966 दीक्षा 27 नवंबर 2015 चौथीपति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर जी बने21आ श्री दर्शनामति जी बड़वाह mp 22 नवंबर 1962 दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा बी ए पति भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री दर्शित सागर जी हैं 22आ श्री देशनामति जी सनावद 14 मार्च 1959 दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा बी ए विशेष भारतीय स्टेट बैक के मैनेजर से त्यागपत्र देकर दीक्षा ली।23आ श्री महायश मति जी सनावद 3 जनवरी 1989 दीक्षा 25 अप्रैल 2018 शिक्षा m s c कंप्यूटर साइंस विशेष दादाजी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी थे।24आ श्री देवर्धिमति जी अकलुज महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर 1983 को जन्म दीक्षा गुरु आर्यिका श्री प्रशांत मति से दीक्षा 8 मार्च 2019 को ली शिक्षा बी कॉम 25आ श्री प्रणत मति जी उदयपुर सन 1961 आर्यिका दीक्षा 29 अगस्त 2022 शिक्षा स्नातक विशेष पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी हैं 26आ श्री निर्मोहमति जी सनावद महेश्वर mp 4 जुलाई 1962 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022 शिक्षा हायर सेकेंडरी विशेष पिता ने आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी थे।27आ श्री पद्मयश मति जी सनावद 12 सितंबर 1996 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022शिक्षा b b a किया 28आ श्री दिव्ययश मतिजी कोटा 3 मई 1996 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022 शिक्षा पॉलिटेक्निक ।29आर्यिका श्री जिनेश मति गोहाटी असम जन्म 9 अक्टूबर 1945 दीक्षा 5 सितंबर 2024 शिक्षा 8 वी 30आ श्री प्रेक्षा मति जी धरियावद 20 दिसंबर 1955 दीक्षा 6 सितंबर 2024 शिक्षा 8 वि विशेष पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री पद्म कीर्ति सागर थे31ऐलक श्री हर्षसागर ,धरियावद जन्म7 जुलाई 1949 दीक्षा 4 मार्च 2025 शिक्षा 10 पिता भी साधु थे।32क्षु श्री प्राप्ति सागर का जन्म महाराष्ट्र 1 जून 1956 में हुआ । दीक्षा आचार्य श्री से 6 सितंबर 2024 को हुई। शिक्षा 10 तक। पत्नी और भाई भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री परमानंद सागर जी एवं आर्यिका श्री विन्रम मति माताजी है हम अक्सर देखते हैं कि सांसारिक जीवन में दायित्व पीढ़ी दर पीढ़ी बदलते हैं जो व्यवसाय दादा करते हैं वह व्यवसाय पिता करते हैं और वही व्यवसाय पोता करता है। और यह परंपरा चलती आती रहती है। लेकिन आचार्य श्री के संघ में उन्हीं के अनुरूप चलते हुए उनसे दीक्षित शिष्यों का परिवार भीआध्यात्मिक मार्ग पर चला। जी हा यहां किसी साधु की माता ने दीक्षा ली ,किसी के भाई ने दीक्षा ली,किसी के दादाजी ने ,बुआजी किसी की पत्नी ने दीक्षा , किसी की बहन ने दीक्षा ली ऐसा जो सभी भी प्रेरणा देते है।
इसके उदाहरण आचार्य श्री संघ में एक ऐसा उदाहरण है जो प्रेरणा देता है समाधिस्थ मुनिश्री 108 चारित्र सागर जीमहाराज की दीक्षा के बाद उनकी पोती आर्यिका 105श्री महायश मति ओर बेटी आर्यिका105 श्री निर्मोह मति बनी।मुनि श्री108 हितेंद्र सागर जी ने पहले दीक्षा ली बाद में पिता भी मुनि श्री 108भुवन सागर जी बने, मुनि श्री 108प्रभव सागर जी के पूर्व उनके भाई भी मुनि श्री 108 सहिष्णु सागर जी ने भी एक साथ दीक्षा ली ।मुनि श्री108 दर्शित सागर जी ओर आर्यिका श्री105 दर्शनामति पूर्व पति पत्नी ने एक साथ दीक्षा ली।मुनि श्री108 प्रबुद्ध सागर जी ओर आर्यिका आर्यिका105श्री प्रणत मति पूर्व पति पत्नी ने भी एक साथ दीक्षा ली। मुनि श्री प्रणित सागर जी की पूर्व माता ने भी आचार्य श्री से दीक्षा ली।उनकी बहन भी आर्यिका थी। आर्यिका105 श्री दिव्यांशु मतिमाताजी के पूर्व माता पिता भी साधु थे। आर्यिका 105श्री समर्पित मति की माता ने भी दीक्षा ली थी। आर्यिका105 श्री विचक्षण मति की माता, सास और पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा ली थी। आर्यिका 105श्री विन्रममति माताजी के पति ने भी क्षुल्लक दीक्षा लेकर श्री प्राप्ति सागर जी बने। आर्यिका105 श्री महायश मति जी के दादाजी भी मुनि थे आर्यिका 105 श्री निर्मोह मति जी के पिता भी साधु थे आर्यिका 105श्री प्रेक्षा मति जी के पति ने भी दीक्षा ली थी। क्षुल्लक 105श्री प्राप्ति सागर जी के भाई भी मुनि श्री108 परमानंद सागर जी थे।पत्नी भी आर्यिका हैं।यह जानकारी वर्तमान 32साधुओं के साधु परिजनों की हैं।समाधिस्थ शिष्य साधुओं की जानकारी नहीं दी। उन शिष्यों में भी भाई_ भाई पति_ पत्नी और साधु के पिता माता ओर पुत्र ने भी दीक्षा ली। जानकारी प्रदाता गुरु भक्त राजेश पंचोलिया के परिवार में पिता श्री मुनि श्री 108 चारित्र सागर जी महाराज कोबेटी आर्यिका105 श्री महायशमति माताजी ओर बहन आर्यिका105 श्री निर्मोह मति जी सहित पंचोलिया परिवार के 7 साधु रहे। संपर्क राजेश पंचोलिया इंदौर 8965065065 9926065065 से प्राप्त आलेख
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
