वर्तमान समय में भगवान राम के मार्ग पर चलने की महती आवश्यकता है आर्यिका विज्ञानमति
| खुरई
वर्तमान समय में मर्यादा पुरुषोत्तमभगवान राम के बताए मार्ग पर चलनेकी महती आवश्यकता है। जब तकहमारा आचार-विचार, रहन-सहन ठीकनहीं होगा तब तक धर्म की बात करना
बेमानी है। हमारे आचार एवं विचारों में मर्यादा झलकनी चाहिए।
प्रत्येक व्यक्ति को बोलने के पूर्व जरूर सोचना होगा, जितना बने अच्छा एवं नेक बोलें, हमारा व्यवसाय भी हिंसात्मक नहीं होना चाहिए। आपके पास पैसा कम है तो पहले किसी की दुकान आदि पर नौकरी करके थोड़ा पैसा इकट्ठा कर लें, फिर छोटी दुकान से काम प्रारम्भ करें। लेकिन दुकान में ऐसा माल रखें,जिससे अपना और जनता का जीवन सुरक्षित रहे।
यह बात प्राचीन जैन मंदिर में आर्यिकारल विज्ञानमति माताजी ने भगवान राम के जन्मोत्सव पर प्रवचन धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।उन्होंने सीख देते हुए कहा कि आपबे टे को व्यापार, दुकान, सर्विस आदि करने के साथ-साथ औसत रूप से दान देने की बात ए अवश्य कहें। एकरुपये में से पाच-दस या दो-चार पैसातो दान देने का संकल्प ही रखें। प्रत्येकमहीने में कमाई का अनुमान लगाकर औसत रूप से दान का पैसा अलग साल छह महीनों का पैसा इकट्ठा करके एक साथ बड़े स्थान पर बड़ी वस्तु का दान करे।

पूज्य माताजी ने कहा की दान की प्रवृत्ति बनी रहने से लोभ की तीव्रता नहींहोती और धनोपार्जन में जो पाप का बंध वह भी हल्का होताजाता है। उन्होंने कहा कि अपनी आय में से कुछ पैसा अपने माता -पिता को देते जाएं।
पूज्य माताजी ने कहा यदि वर्तमान में वह लेने से मना करते हैं
तो उनके लिए अलग रखे। ताकि आप उनका थोड़ा सा उपकार चुका पाएं। आप कमाना प्रारम्भ करने के साथ-साथ ही यह आदतडालें, जिससे भविष्य में आपकोमाता-पिता की सेवा में कुछ भी विचारकरने की आवश्यकता न पड़े, आप यह नहीं सोचें कि दान भी देना है,माता-पिता को भी देना है और घर का खर्च भी चलाना है, इतना निकल जाएगा तो बचेगा ही क्या आप यदि
अपनी आय का सही सही अनुपातबनाएंगे तो आपके घर खर्च का10-15 प्रतिशत भी इन दो कामों में नही लगेगा। घर में खर्च किया हुआकुछ भी फल नहीं देगा जबकि दानदिया हुआ और माता-पिता की सेवा में लगाया गया पैसा आपको इतना फल देगा जिसको गिना नहीं जा सकता है।कहा भी है धन की जड़ धर्म होती है।जो हमेशा वृक्ष की जड़ों में खाद पानी डालता रहता है उसका वृक्ष कभी नहीं सूखता है। आपके जीवन में ये दो अतिआवश्यक धर्म कार्य हैं, आप इनकोकरते रहें, आपका धन रूपी वृक्ष कभी नहीं सूखेगा, सदा हरा-भरा रहेगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
