जीवन को सफल बनाने के लिए चिंतन जरूरी विनम्र सागर की जैन भवन में धर्मसभा, कहा- परिवर्तन को रोकने के लिए पुस्तकों की अहम भूमिका होती है
| मदनगंज किशनगढ़
मुनिश्री 108विनम्र सागर महाराज ने कहा कि जीवन में
मनुष्य को सदैव सही कर्म करने चाहिए। हम सबको अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है।
जैनभवन में आयोजित धर्मसभा में श्रावकों को संबोधित कर रहे थे। मुनिश्री ने कहा कि सम्यक दृष्टि की संख्या बहुत कम होती है। विरले ही सम्यक दृष्टि वाले बनते हैं। सबसे पहले दर्द सहने व दर्द देने का चिंतन करना चाहिए।


जैन भवन में बुधवार को आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते मुनिश्री ने कहा किसी जीव को दुख, दर्द नहीं देना
चाहिए। जीवन को सफल बनाने केलिए चिंतन करना पड़ेगा। बुरे कर्मों का अचानक उदय होता है।


महाराज श्री ने कहा कि जीवन में संतुष्टि होना बहुत जरूरी है। सम्यक दर्शन से पाप कर्म का असर कम होना शुरू हो जाता है। मिथ्या दृष्टि का पुण्य समाप्त हो जाता है, लेकिनसम्यक दृष्टि का पुण्य भगवान बनने तक रहता है। अंतर मन से कभी झूठन हीं बोलना चाहिए। संसार को धर्म-आगम की दृष्टि से देखना चाहिए।मनुष्य के अंदर के आतंक, क्रोध,लोभ, माया, हिंसा, झूठ, चोरी सेबचाव के लिए धर्म मार्ग पर चलकर ही जीवन को सार्थक किया जा सकता है। परिवर्तन को रोकने के लिए पुस्तकों की अहम भूमिका होती है।


इससे पूर्व धर्म सभा में मुनि निस्वार्थ सागर महाराज ने आचार्य विद्यासागर महाराज का पूजन करवाया।इसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अर्घ्य समर्पित किए। दोपहर में समयसार का शिक्षण एवं शाम को आचार्य भक्ति व प्रश्न मंच के बाद आरती का आयोजन किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
