जिनसे बात करते करते बात खत्म नहीं होती थी.. आज उन्हीं से बात करने का मन नहीं करता-? अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
औरंगाबाद/जयपुर।
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि दाम्पत्य जीवन में जब तक समर्पण और विश्वास है, तब तक जीवन आनंद व प्रेममय है। जहां विश्वास कमज़ोर हुआ और तर्क-कुतर्क आपसी रिश्ते में पैदा हुये, बस वहीं से रिश्ता डेमेज होने लगता है। फिर रिश्ता तो रहता है लेकिन रिश्ता रोज रोज रिसता है।
दाम्पत्य जीवन का आनंद तो समर्पण और विश्वास से ही चलता है । मन बीच बीच में अहंकार मांगेगा, लेकिन मन की सुनना नहीं, मन अकड़ने को कहेगा, तब भी मन की सुनना नहीं। झुककर जीना, ताकि सारा संसार तुम्हारे चरणों में झुक जाये। दाम्पत्य जीवन में कभी पति छोटा बन जाये, कभी पत्नी छोटी बन जाये, ताकि जीवन बिगड़ ना पाये। जो लड़की शादी के पहले लक्ष्मी, सरस्वती, देवी के रूप में दिखती है, और शादी के बाद – दुर्गा का रूप धारण कर लेती है, ऐसा क्यों होता है-? इसलिए होता है, एक दो अक्षर की कविता –
तु –
मैं-
मैं-
तू –
तू-तू– मैं-मैं विवाह के शुरू में पति, पत्नी से कहता है – मेरे लिए तू ही सब कुछ है, मुझे तेरे सिवाय कुछ नहीं चाहिए। तू है तो सब कुछ है, तू है तो आनंद है, प्रेम है, ज़िन्दगी है। पति – पत्नी को जब तक आगे रखता है, तब तक जीवन धरती पर स्वर्ग लगता है और जैसे ही पति पत्नी को पीछे करता है और कहता है मैं – मैं ही हूं। मैं मुख्य हो जाता है, और “तू” गौण हो जाता है, तो पत्नी के अहंकार को चोट पहुंचती है, तो वह भी अहम में जीने लगती है। फिर अच्छे खासे दाम्पत्य जीवन में, तू तू-मैं-मैं-का द्वन्द शुरू हो जाता है, जो फिर जिन्दगी भर चलता है।

दाम्पत्य जीवन के सुख शान्ति आनंद प्रेम के लिए सोच और पानी को साफ सुथरा होना चाहिए। पानी साफ होता है तो तबियत ठीक रहती है और सोच अच्छी होती है तो ज़िन्दगी अच्छी होती है…!!! 


परम पूज्य गुरुदेव अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज जी ससंघ का पदविहार आज दिनाँक 4 फरवरी 2026, बुधवार दोपहर 2.00 बजे श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, झोटवाड़ा, जयपुरसे श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, मंगल विहार, गोपालपुरा बाईपास, नियर रिद्धि-सिद्धि क्रोसिंग जयपुर 14 किलोमीटर के लिए होगा
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
