आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सानिध्य में जयपुर में पहली बार होगा ‘विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव’25 वर्ष तक के वैवाहिक जीवन वाले दंपतियों को मिलेगा आदर्शमयी संस्कार का मार्गदर्शन

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आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सानिध्य में जयपुर में पहली बार होगा ‘विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव’25 वर्ष तक के वैवाहिक जीवन वाले दंपतियों को मिलेगा आदर्शमयी संस्कार का मार्गदर्शन

औरंगाबाद/जयपुर

साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में मानसरोवर (शिप्रा पथ) स्थित वी.टी. रोड ग्राउंड पर भव्य ‘भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव’ एवं ‘विश्व शांति महायज्ञ’ जारी है।

 

 

इसी अनुष्ठान के तहत रविवार, 1 फरवरी 2026 को जयपुर में पहली बार ‘विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव’ का आयोजन होने जा रहा है। सामंजस्य और मजबूती का मंत्र रविवार प्रातः 7.00 बजे से आयोजित होने वाले इस महोत्सव में 1 वर्ष से लेकर 25 वर्ष तक के वैवाहिक जीवन वाले दंपतियों को आमंत्रित किया गया है। आचार्य श्री द्वारा दंपतियों को आदर्श वैवाहिक जीवन, संयम, संस्कार युक्त आचरण और आपसी रिश्तों में सामंजस्य

स्थापित करने के सूत्र बताए जाएंगे।

ड्रेस कोडः पुरुषों के लिए सफेद वस्त्र एवं महिलाओं के लिए केसरिया साड़ी अनिवार्य है।पंजीकरणः महोत्सव में सहभागिता हेतु ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से निःशुल्क पंजीकरण करना होगा।

वाणी और व्यवहार में न हो हल्कापनः

आचार्य श्री इससे पूर्व चल रहे श्री चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान में गुरुवार को प्रतिष्ठाचार्य बा.ब. तरुण भैया (इंदौर) के निर्देशन में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई। अष्ट द्रव्य से 146 अर्घ्य समर्पित कर धर्म ध्वजाएं चढ़ाई गई।

आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा ‘जीवन में वाणी और व्यवहार में कभी भी हल्कापन नहीं होना चाहिए। हमेशा सोच-समझकर ही बचन बोलने चाहिए। बिना व्रतों और संयम के जीवन पशु समान है।’

उपाध्याय पियूष सागर महाराज ने भी संबोधित करते हुए कहा कि जिंदगी एक रेलगाड़ी के समान है, जिसे अनुशासन और संयम की पटरियों पर ही चलना चाहिए। क्या है चारित्र शुद्धि व्रत और विधान? चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान जीवन के दोषों को दूर करने और आत्मशुद्धि का मार्ग है। जैन परंपरा के अनुसारः1234 उपवासः इस व्रत के तहत 1234 उपवासों का विधान है, जिससे तीर्थंकर पद की प्राप्ति और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

तेरह प्रकार का चारित्रः इसमें पांच महाव्रत, पांच समिति

और तीन गुप्तियों की शुद्धि पर बल दिया गया है। नियमः व्रत के दौरान श्रृंगार, टीवी, हिंसक पदार्थ और कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) का त्याग कर स्वाध्याय किया जाता है। आज आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज को श्रीफल भेंट कर नेमिसागर कॉलोनी के लिए किया निमंत्रिन 

  नेमिनाथ दिगंबर जैन समाज समिति द्वारा आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ को नेमिसागर कॉलोनी में प्रवास हेतु श्रीफल भेंट कर मंगल निमंत्रण दिया गया। समिति के अध्यक्ष जे. के. जैन कालाडेरा ने बताया कि पूज्य आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज वर्तमान में मानसरोवर में ससंघ विराजमान हैं। उनके संघ में इस समय 16 मुनि एवं आर्यिकाएं सम्मिलित हैं। इस अवसर पर श्रेष्ठी विमल पाटनी, पूनम ठोलिया, प्रदीप निगोतिया, संजीव कासलीवाल, विजय बडजात्या, विरेन्द्र गोधा, जैना गंगवाल, मुन्नी ठोलिया, संतोष बाकलीवाल सहित समाज की महिलाएँ एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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