बिना लक्ष्य की भाग दौड़ में गति तो है लेकिन मन्ज़िल नहीं..और लक्ष्य पूर्वक चलने, दौड़ने, भागने में प्रगति भी है और मन्ज़िल भी..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

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बिना लक्ष्य की भाग दौड़ में गति तो है लेकिन मन्ज़िल नहीं..और लक्ष्य पूर्वक चलने, दौड़ने, भागने में प्रगति भी है और मन्ज़िल भी..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

 

औरंगाबाद/जयपुर।

अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि हमारे मन में कामनाओं की कल्पनाएं मधु मक्खियों की तरह भिनभिनाती रहती है। मन थोड़ी-थोड़ी देर में, जगह-जगह गड्ढा खोदता है और पानी नहीं निकलने से मन हताश निराश होकर बैठ जाता है। फिर हम कहते हैं – हमारी किस्मत साथ नहीं देती य मेरी तो किस्मत ही फूटी है। अरे बाबू! जगह-जगह गड्ढे मत खोदो, एक जगह मेहनत से गड्ढा खोदो तो मीठे पानी के श्रोत बह जायेंगे। किसी एक कार्य को लक्ष्य पूर्वक करो, सफलताएं आपका स्वागत करेगी। भारत में ऐसी कोई जमीन, भूमि नहीं है जहां पानी के श्रोत ना बह रहे हों, सिर्फ खोदने की आवश्यकता है।

 

हां यह सच है कि कहीं 10 फिट पर, कहीं 50 फिट पर, कहीं 100 फिट पर, कहीं 500, तो कहीं 1000 फिट पर पानी के श्रोत बह रहे हैं। दस गड्ढे खोदने की अपेक्षा, एक गड्ढा इतना गहरा खोदो कि मीठे पानी के श्रोत बह जायें। किसी कार्य को सफल करने के लिए खूब मेहनत करो, सफलताएं आपो आप स्वागत करने चरणों में आयेगी।

 

 

हौसला और घोंसला कभी मत छोड़िए.. समय पर सब कुछ अच्छे से अच्छा हो जायेगा…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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