वात्सल्य वारिधि मंगल विहार के क्षणों में पिता के अश्रुपूरित नयन को देख नन्हा बालक भी अपने आंसू नहीं रोक पाया 

धर्म

वात्सल्य वारिधि मंगल विहार के क्षणों में पिता के अश्रुपूरित नयन को देख नन्हा बालक भी अपने आंसू नहीं रोक पाया 

निवाई 

यूं ही नहीं वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज वात्सल्य वारिधि नहीं कहे जाते। गुरुदेव जिन शासन की वरिष्ठतम संतों में से एक हैं। 

 

उनका आशीष अपने संघ में विराजमान मुनिराज एवं समस्त संघ के प्रति ही नहीं अपितु भक्तों पर भी बरसता है। जब गुरुदेव करुणा की छाव और अपने हाथ उठाकर सभी को अपना आशीर्वाद देते हैं तो उनके चेहरे की मुस्कान अपने आप में उनकी वात्सल्यता की निशानी कहती है। 

   पिता मोहित को देख गोद में बैठा नन्हा बालक भी अपने आंसू नहीं रोक पाया

परम पूज्य गुरुदेव शीतकाल प्रवास के दौरान निवाई नगर में विराजमान थे उनका बिहार सोमवार की बेला में पदमपुरा की ओर हुआ। गुरुदेव का वात्सल्य का जीता जागता उदाहरण जब देखने को मिला जब पूज्य गुरुदेव की मंगल विहार से पूर्व भक्ति भाव के साथ पूजन चल रही थी। और सभी का मन द्रवित एवं भावुक था गुरुदेव लगभग एक माह से अधिक निवाई नगर में विराजमान थे और अलौकिक धर्म प्रभावना की उसी का प्रतिरूप था कि सभी गुरुदेव के वात्सल्य से अभिभूत थे। 

 

पूजन की बेला में जिन्होंने युवा संघ के भक्त गुरुदेव का पूजन कर रहे थे तभी मोहित चवरिया विहार के इन क्षणों में अपनी आंखों के आंसू को नहीं रोक पाए इस समय अश्रु परित नयन को देख उनकी गोद में बैठा हुआ नन्हा बालक अपने पिता के अश्रु नयन को देख अपने आंसुओं को नहीं रोक पाया एवं पिता की गोद में बैठा हुआ भावुक एवं उदास हो गया। 

इन दृश्यों को देख यही कहा जा सकता है कि पंचम युग में ऐसे संत जो विलक्षण प्रतिभा के धनी है जिनकी साधना दिव्यता की झलक स्पष्ट परिलक्षित करती है साथ ही वे स्वयं के लिए कठोर लेकिन अपने भक्तों के प्रति अपना वात्सल्य भरपूर देते हैं। कोई अतिशयोक्ति नहीं है आचार्य श्री साधना की प्रतिमूर्ति तो है ही इसके साथ ही वह वात्सल्यता की जीवंत प्रतिमूर्ति हैं। 

राजेश पंचोलिया के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *