पांच सूत्र अपनाएं, जीवन सफल बनाएं : आचार्य कुमुदनंदी 

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पांच सूत्र अपनाएं, जीवन सफल बनाएं : आचार्य कुमुदनंदी 

पावागिरी ऊन दीपक प्रधान धामनोद की रिपोर्ट 

पावागिरी ऊन में आयोजित मेला महोत्सव के दौरान आचार्य कुमुदनंदी जी ने प्रवचन देते हुए कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में पांच सूत्र अपना ले तो उसका जीवन सफल हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो मिला उसे खुशी से स्वीकार करें, कम बोलें और सार्थक बोलें, हर कार्य विवेकपूर्वक करें तथा किसी की निंदा-बुराई से दूर रहें।

 

उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति में समझदारी, जवाबदारी, ईमानदारी और वफादारी जैसे गुण नहीं होते, वह सच्चे अर्थों में इंसान कहलाने योग्य नहीं होता।

 

 

 

इस अवसर पर आचार्य विपणत सागर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जब भी धर्म कार्य करने का अवसर मिले उसे छोड़ना नहीं चाहिए। आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको पुण्य अर्जित करने का अवसर प्राप्त हुआ है, क्योंकि कई लोग अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद धर्म कार्यों में रुचि नहीं ले पाते।

 

 

 

वहीं अरिहंत कीर्ति भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी ने कहा कि भगवान से अलग होने पर शरीर का कोई महत्व नहीं रह जाता। जिन आंखों से संत और भगवान के दर्शन नहीं होते, वे नेत्र मयूर पंख की आंखों के समान मात्र हैं। जो मस्तक संत और भगवान के समक्ष नहीं झुकता, वह कड़वे तुंबे के समान है और जिस जीभ से भगवान का नाम नहीं लिया जाता, वह मेंढक की जीभ के समान है।

नवदेवता मंडल विधान का आयोजन

पावागिरी ऊन के ट्रस्टी संजय बडूद, मनीष दोषी और दीपक प्रधान ने बताया कि 7 मार्च को प्रतिष्ठाचार्य पंडित धर्मचंद्र शास्त्री (दिल्ली) के निर्देशन में प्रातः नित्य अभिषेक पूजन के बाद नवदेवता मंडल विधान का आयोजन भक्ति एवं संगीतमय वातावरण में प्रारंभ हुआ। शाम तक चले विधान पूजन में श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा के साथ भगवान की भक्ति-आराधना की।

 

 

 

 

दूसरी ओर नवनिर्मित सहस्त्रकूट जिनालय में शनिवार को भी रत्नमयी प्रतिमाओं के विराजमान होने का कार्य दिनभर चलता रहा। बाल ब्रह्मचारी अक्षय भैया जी और पंडित श्री नितिन झांझरी के निर्देशन में मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने प्रतिमाएं विराजमान की।

 

आचार्य श्री ने की केशलोच क्रिया

इस दौरान आचार्य विपणत सागर जी ने जैन धर्म की अत्यंत कठिन साधना के रूप में केशलोच क्रिया भी संपन्न की। इस क्रिया के अंतर्गत आचार्य श्री ने सभी श्रद्धालुओं के समक्ष अपने हाथों से सिर और दाढ़ी के बाल उखाड़कर तप और संयम की साधना का उदाहरण प्रस्तुत किया।

 

 

 

 

कवि सम्मेलन में गूंजा हास्य

शाम को आरती, भक्ति और शास्त्र प्रवचन के बाद विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें शहनाज हिंदुस्तानी (जयपुर), कवि जैन विद्रोही (ललितपुर) सहित करीब छह कवियों ने हास्य और व्यंग्य कविताओं के माध्यम से श्रद्धालुओं का भरपूर मनोरंजन किया।

 

 

 

दिल्ली की नृत्य नाटिका को मिली सराहना

शुक्रवार रात्रि को दिल्ली के मयूर जैन द्वारा प्रस्तुत नृत्य नाटिका में पावागिरी ऊन के इतिहास तथा सती चेलना रानी के प्रसंग पर आधारित प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। मिमिक्री कलाकार मयूर जैन ने विभिन्न पात्रों की अलग-अलग आवाजें प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया।

 

 

रविवार को होगा महा मस्तकाभिषेक

महोत्सव के अंतिम दिन रंग पंचमी पर प्रातः नित्य अभिषेक पूजन, मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, आचार्य श्री की मंगल देशना तथा अतिथियों के सम्मान के बाद भगवान की भव्य शोभायात्रा बैंड-बाजों के साथ निकाली जाएगी।

इसके बाद पहाड़ मंदिर में भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरहनाथ, महावीर स्वामी तथा स्वर्ण भद्रादि चार महामुनिराज की प्रतिमाओं का महा मस्तकाभिषेक संपन्न होगा। साथ ही सहस्त्रकूट जिनालय में शेष सभी प्रतिमाओं को विराजमान किया जाएगा।

संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

मो. 9929747312

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