आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज ससंघ का वीरोदय तीर्थ से बड़ोदिया के लिए विहार हुआ धर्म जीवन जीने की कला सिखाता है: आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज
बड़ोदिया
श्रावक को धन धर्म पूर्वक ही कमाना चाहिए। वही धन कार्यकारी होता है। यह उपदेश वीरोदय तीर्थ पर गुरुवार को आचार्य श्री 108आर्जव सागर महाराज ने धर्म सभा में श्रावकों को संबोधित करते हुए दिया।आचार्य श्री ने कहा कि केवल धन कमाना ही महत्वपूर्ण नहीं है उसके साथ धर्म व अध्यात्म भी जरूरी है।धन संपत्ति स्थाई नहीं होते लेकिन धर्म हमेशा साथ देता है। धर्म के प्रभाव से व्यक्ति निखरता है और केवल धन के प्रभाव से बिखरता है।
आचार्य श्री ने कहा कि धर्म हमें जीवन जीने। की कला सिखाता है। आज मनुष्य धन की दृष्टि से तो समृद्ध हो रहा है लेकिन धार्मिक व आध्यात्मिक दृष्टि से दरिद्र हो रहा है। हमें रागी नहीं बैरागी। बनना है क्योंकि यदि रागी बने रहे तो संसार में चौरासी के चक्कर में भटकते



ही रहेंगे।
इससे पूर्व आचार्य संघ के सानिध्य में वीरोदय तीर्थ के मूलनायक भगवान आदिनाथ की प्रतिमा पर जलाभिषेक वशांतिधारा का सौभाग्य वीरोदय तीर्थ कमेटी व श्रद्धालुओं को मिला।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
