सम्मेद शिखर तीर्थ को पर्यटन स्थल बनाने के विरोध को लेकर सड़कों पर उतरा जैन समाज
रामगंजमंडी
झारखंड में स्थित हजारों साल पुराने सम्मेद शिखर तीर्थ को झारखंड सरकार एवं केंद्र सरकार के द्वारा वन्य जीव अभ्यारण इको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत घोषित कर वहां पर्यटन की अनुमति देने के प्रयासों एवं नोटिफिकेशन जारी करने के विरोध में सकल जैन समाज रामगंजमंडी जिसमें दिगंबर श्वेतांबर सभी ने एक साथ मिलकर एकजुटता के साथ रैली निकाली।
रामगंजमंडी में ऐतिहासिक निकाली गई रैली
शहर के बाजार नंबर 1 में स्थित दिगंबर जैन मंदिर पर सुबह से ही जैन समाज के पुरुष बच्चे महिलाओं का आना शुरू हो गया यह रैली सुबह 9:00 बजे प्रारंभ होकर बाजार नंबर 6 युवा दल चौराहा, पन्नालाल चौराहा, सरकारी कुआ चौराहा, माल गोदाम चौराहा होते हुए पुलिस थाने के सामने से होती हुई अदालत परिसर पहुंची। रामगंज मंडी के इतिहास में इतनी बड़ी विरोध रैली आज तक नहीं निकली यदि गौर किया जाए तो रैली का एक सिरा युवा दल चौराहे पर था तो दूसरा सिरा मालगोदाम चौराहे पर नजर आ रहा था। लगभग 2 किलोमीटर लंबी रैली में जैन समाज के पुरुष और महिलाएं बच्चे बड़ी संख्या में हाथों में नारे लिखी तख्तियां को लेकर नारे लगाते हुए चल रही थी।
तख्तियों पर यह लिखे हुए थे संदेश
सत्य अहिंसा नारा है सम्मेद शिखर तीर्थ हमारा है, बहुत सह लियां अब ना सहेंगे अपने अधिकार ले के रहेंगे। केंद्रीय वन मंत्रालय होश में आओ तुगलगी नोटिफिकेशन रद्द करो,
20 जैन तीर्थंकरों की मोक्ष स्थली को पर्यटक स्थल घोषित करना स्वीकार नहीं जैसे नारे पूरे जोश और उत्साह से सुनाई दे रहे थे। विरोध रैली के बैनर लेकर जैन समाज की महिलाएं और पुरुष चल रहे थे।
हजारों लोगों की उपस्थिति में प्रशासन को दिया ज्ञापन
अदालत परिसर के मुख्य द्वार पर आए तहसीलदार को आदिनाथ जैन श्वेतांबर श्री संघ के अध्यक्ष राजकुमार पारख, शांतिनाथ दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष अजीत कुमार सेठी, बघेरवाल जैन समाज अध्यक्ष महेंद्र ठोरा, नगर कांग्रेस अध्यक्ष अजीत पारख, हुकुम बाफना, दिलीप विनायका, ज्ञानचंद सबदरा, विजय कुमार छाजेड़, बघेरवाल समाज महामंत्री पदम सुरलाया, चक्रेश जैन, राजकुमार गंगवाल, जैन सोशल ग्रुप अध्यक्ष प्रदीप शाह, सचिव राजीव बाकलीवाल, वीर जैन सोशल ग्रुप अध्यक्ष सुनील सुरलाया, ज्ञानचंद डांगी, प्रकाश धारीवाल, प्रदीप चतर, सुभाष बाफना, संजय पतीरा, रूपचंद लाडवा, संजय बीजावत, करुणेश जैन, नीलेश ठाई, राजेंद्र राका, सिद्धार्थ बाबरिया, शांतिनाथ महिला मंडल अध्यक्ष शोभना सांवला, एवं महिलाओं सहित हजारों लोगों के हजूम की उपस्थिति में भारत के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री, झारखंड के राज्यपाल, झारखंड के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री के नाम ज्ञापन सौपे गए।

श्वेतांबर जैन समाज के अध्यक्ष राजकुमार पारख ने समस्त जैन समाज की ओर से जानकारी देते हुए बताया कि ज्ञापन में पारसनाथ पर्वत राज को वन्य जीव अभ्यारण पर्यावरण पर्यटन के लिए इको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत जोनल मास्टर प्लान व पर्यटन मास्टर प्लान, पर्यटन मास्टर प्लान, पर्यटन सूची से बाहर किया जावे। झारखंड सरकार की अभिशंसा पर केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना 27951 इ दिनांक 2 अगस्त 2019 का अविलंब रद्द किया जावे। सम्मेद शिखर तीर्थ को मांस मदिरा मुक्त पवित्र जैन तीर्थ स्थल घोषित किया जावे। पर्वतराज के वंदना मार्ग को अतिक्रमण वाहन संचालन व अभक्ष्य सामग्री की बिक्री मुक्त किया जावे पर्वतराज पर पेड़ों का अवैध कटन, पत्थरों का अवैध खनन, महुआ के लिए आग लगाना प्रतिबंधित करने की मांग रखी।

जैन समाज भामाशाह की संतान राजकुमार पारख
रैली के दौरान राजकुमार पारख ने अपने जोशीले उद्बोधन में कहा कि जैन समाज भामाशाह की संताने हैं। जैसे भामाशाह ने राजस्थान की शान बढ़ाने में महाराणा प्रताप को पूरा खजाना अपना देकर सहयोग किया था आज देश का जैन समाज सारी सरकारों को भामाशाह की तरह आर्थिक सहयोग कर रहा है। जैन समाज ने कभी भी अपने तीर्थो के लिए सरकारों से कुछ नहीं मांगा लेकिन जैनियों के किसी भी तीर्थ को अगर सरकारों ने निशाना बनाया तो जैन समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।
जैन समाज की दिखी एकता
सकल दिगंबर समाज, सकल श्वेतांबर जैन समाज, स्थानकवासी श्री संघ, जैन सोशल ग्रुप, वीर जैन सोशल ग्रुप, सुप्रभात समूह, दोनों समाज के महिला मंडल के साथ हर व्यक्ति रैली में पहुंचा। इस महारैली में मोड़क गांव, मोडक स्टेशन, चेचट, खैराबाद की जैन समाज के सभी सदस्य मौजूद रहे।
जितना आक्रोश इस महारैली में देखने को मिला वह किसी से अछूता नहीं रहा। इस रैली को लेकर समस्त जैन समाज रामगंजमंडी ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर अपने सारे कामों को छोड़कर सरकार के खिलाफ आक्रोश प्रकट किया। महिला शक्ति युवा शक्ति बच्चे बूढ़े सभी ने इस रैली में अपनी एकता दिखाते हुए सरकार को आगाह किया कि अगर यह निर्णय वापस ना लिया तो समाज को उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। लगभग 1 से 2 किलोमीटर की यह महारैली एक नया इतिहास बना गई। यही कहा जाएगा अगर यही रैली जैन समाज के अलावा अगर किसी अन्य समाज की होती तो पुलिस प्रशासन सरकार को भारी सुरक्षा व्यवस्था को करना पड़ता लेकिन जैन समाज अहिंसक समाज है और जो विरोध प्रदर्शन समाज ने दिखाया है वह सचमुच काबिले तारीफ है। सभी समाज जन का कहना है अहिंसक समाज के साथ पवित्र स्थल पर यह कुठाराघात कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
