विद्याधर को विद्यासागर बनाने वाले उनके गहन मित्र मारुति दादा ने मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का लिया आशीष

धर्म

विद्याधर को विद्यासागर बनाने वाले उनके गहन मित्र मारुति दादा ने मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का लिया आशीष
पारसनाथ
सम्मेद शिखर की तलहटी पर स्थित गुणायतन परिसर में विराजित पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज संघ का मंगल आशीष लेने विद्याधर को विद्यासागर मुनिराज बनाने वाले श्री मारुति दादा आए।

 

 

 

श्रीमान पंकज जैन शास्त्री सलूंबर निवासी ने हमें यह जानकारी प्रदान की यह वह व्यक्तित्व है जिसका जैन समाज ही नहीं संपूर्ण मानव जगत सदा सदा ऋणी रहेगा। विद्याधर को विद्यासागर बनाने वाले यह महान विभूति मारुति दादा बहुत सी पुस्तकों में इनके प्रसंग मिलता है।

यह और कोई नहीं है जब आचार्य श्री विद्यासागर महाराज विद्याधर के रूप में थे और अपना ग्रहस्थ जीवन व्यतीत कर रहे थे। आज वह युग शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के रूप में जाने जाते हैं। सभी जानते हैं श्री मारुति दादा युग शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के बाल सखा है और इनका जैन समाज पर महान उपकार है। उन पलो को हमें जानना आवश्यक है।

 

 

 

जब आचार्य श्री देशभूषण सागर जी महाराज से व्रत के लिए सदलागा .कर्नाटक से जयपुर जा रहे थे तब टिकट के पैसे और यात्रा के लिए 112 रुपया खर्च 1967 में मारुति दादा जी ने दिया था और विद्याधर को घर से बाहर निकाला था। इन्होंने आठवीं कक्षा तक आचार्य जी के साथ शिक्षण अध्ययन किया और विद्याधर के ग्रहस्थ अवस्था के बहुत सारे कार्य साथ में रहकर उन्होंने किए। और बहुत से प्रसंग उनके मुख से सुने जा सकते है।

एक नजर श्री मारुति दादा के व्रत नियम संयम पर


श्री मारुति दादाजी जैन नही है लिंगायत है 1968 में दादा गुरु ज्ञान सागर जी महाराज से आजीवन ब्रह्मचारी व्रत लिया और विवाह नही किया। वे जब प्रथम बार प्रमाण सागर जी के दर्शन को आए। तब देखा गया की उन्हे जैन स्तुति भक्ति कठस्थ है और तत्वार्थ सूत्र का पाठ भी पढ़ लेते है! यह सचमुच अपने आप में अद्भुत है कि जैन होने के बावजूद भी हम लोग मौखिक स्तुति एवं पाठ नहीं कर पाते हैं लेकिन श्री मारुति दादा इन सबको मौखिक बोल रहे हैं।

संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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