साधिका आश्रम का उद्घाटन… सुशीला पाटनी आरके मार्बल ग्रुप के कर कमल से हुआ*आचार्य श्री ने आत्म तत्व को पवित्र कर ऊंचाइयों को छुआ- मुनि श्री पुनीत सागर
सागर/
साधिका आश्रम की भूमिका गुरुदेव ने कुंडलपुर में बनाई थी और कहा था जब वृद्ध अवस्था में शरीर व्याधियों से घिर जाता है तो परिवार वाले उन्हें अस्पताल में डाल देते हैं धर्म ध्यान करने वालों का अंतिम समय अच्छा नहीं हो पता है अंतिम समय अच्छा हो इसके लिए आश्रम बनाया जाए गुरुदेव ने बहुत आगे की सोच करके यह कार्य किया है वह ऐसे ही संतो के सरताज नहीं थे उन्होंने अपने आत्म तत्व को पवित्र कर ऊंचाइयों को छुआ था। यह बात मुनि श्री पुनीत सागर महाराज ने साधिका आश्रम के उद्घाटन अवसर पर धर्म सभा में कही।
उन्होंने कहा कि बहुत पहले आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जब कटनी में विराजमान थे उन्हें मलेरिया हो गया था तो उन्हें लगने लगा था कि शायद संलेखना लेनी होगी वे सजग थे अपने आत्म कल्याण के लिए लेकिन बाद में उनका स्वास्थ्य ठीक हो गया आचार्य श्री जब भी कभी सागर का नाम सुनते थे तो वे मुस्कुराते थे और कहते थे कि सागर वाले समर्पित भाव से काम करते हैं मुनि श्री ने कहा गुरुदेव ने स्व कल्याण और पर कल्याण का कार्य किया है।

1980 में मोराजी में ब्राह्मी आश्रम शुरू कराया था ताकि बहने अपनी साधना कर संलेखना करेगी संलेखना उसी की होती है जिसके प्रतिमाओं के व्रत होते हैं 8 से लेकर 11 प्रतिमाओं के व्रत लेने वालों को साधक कहते हैं आचार्य श्री ने एक बार कहा था की मुनि बनने का स्वाद वह अच्छे तरीके से नहीं ले पाए हैं जब उनसे पूछा कहा गया ऐसा क्यों बोल रहे हैं तो उन्होंने जवाब दिया था कि मुनि बने 4 वर्ष हुए थे। 
और आचार्य ज्ञान सागर ने उनके ऊपर आचार्य पद का बड़ा भार दे दिया था आचार्य विद्यासागर महाराज की समाधि हुई।

उन्होंने एक आदर्श प्रस्तुत किया आचार्य श्री बहुत निष्प्रही थे क्षुल्लक अवस्था में (भावी आचार्य मुनि श्री श्री समय सागर महाराज) को मलेरिया हो गया था तो गुरुदेव ने कटनी में उन्हें छोड़ कर कुंडलपुर की ओर बिहार किया जब क्षुल्लक समय सागर जी का स्वास्थ्य ज्यादा बिगड़ गया तो वहां से पंडित जगमोहन शास्त्री ने अपने बेटे को पत्र देकर कुंडलपुर भेजा और कहा कि गुरुदेव से कहना कि आप वापस आ जाओ लेकिन गुरुदेव ने उल्टा कह दिया की पंडित जी आप सब जानते हैं यदि आपको लगता है तो उन्हें संलेखना की तैयारी करवा दें ताकि उनकी समाधि अच्छे से हो जाए ऐसे निष्प्रही आचार्य श्री थे लेकिन दूसरे दिन से समय सागर जी का स्वास्थ्य ठीक हो गया और गुरुदेव ने अपनी समाधि के पूर्व उन्हें आचार्य पद सौंप दिया गुरुदेव ने एक से एक साधु अपने संघ में रखे हुए थे।

मुनि श्री आगम सागर महाराज ने कहा साधना के लिए जगह की भी आवश्यकता होती है शौच ऐसी जगह जाना चाहिए जहां पर अहिंसा व्रत का पालन हो सके एक जीव को अपने जीवन दान दे दिया तो वह यह दान सुमेरु पर्वत पर बराबर सोना दान करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है जीवन को दान देने वाला बड़ा है जीव का जीवन दान अहिंसा धर्म की नींव माना जाता है इससे आत्मा की ऊंचाई प्राप्त होती है। गुरुदेव को देखकर आर्यिकाओ ने अहिंसा के व्रत को पाला है और
आर्यिकाओं की साधना भी काम नहीं है दो वर्षों में यह श्री विद्यासागर साधिका आश्रम बनकर तैयार हो गया है आप लोग आत्मा की कल्याण के लिए भूमि दान नहीं दे रहे हैं बल्कि जीव जंतुओं के

जीवन का दान दे रहे हैं ऐसा आचार्य श्री ने कहा था। सुबह 10:30 बजे मुनि संघ और आर्यिका गुरुमति, आर्यिका दृढ़मति, आर्यिका गुणमति, आर्यिका अकंपमति माताजी के ससंघ सानिध्य में 20 साधिकाओं को नए भवन में प्रवेश कराकर उद्घाटन किया गया। इस भवन में 40 कमरों का निर्माण कराया गया है इसमें लगभग ढाई करोड़ की लागत आई है
सुबह अभिषेक, शांति धारा, पूजन के बाद आचार्य श्री की पूजन हुई और फिर वास्तु हवन ब्रह्मचारी नितिन भैया दीपक भैया और धीरज भैया के द्वारा मुनि संघ और आर्यिका संघ के सानिध्य में संपन्न हुआ इसके बाद आचार्य श्री के प्रवचन के अंश लोगों को दिखाए गए विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि साधिका आश्रम खुलने से व्रती महिलाओं को लाभ होगा और आचार्य श्री का सपना सागर वालों ने पूरा किया है। उदासीन आश्रम के अध्यक्ष राजा भैया और महेश भैया का सभी ने सम्मान किया कार्यक्रम में जयपुर से सुशीला अशोक पाटनी, अजित रेवाड़ी, महेंद्र भूसा, मुकेश जैन ढाना, नेवी जैन, अरुण बमोरी, दिनेश बिलहरा, आदि उपस्थित थे।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312
