संसार एक रंगमंच, हम सभी नाटक के पात्र हैं : स्वस्ति भूषण माताजी
टोडारायसिंह
जैन भवन में भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी के सान्निध्य में सोमवार को धार्मिककार्यक्रम हुए। जैन समाज अध्यक्ष संत कुमार जैन, समाज प्रवक्तामुकुल जैन ने बताया कि सुबह माताजी के सान्निध्य में जैन भवन सहित आदिनाथ मंदिर, नेमीनाथ मंदिर एवं पार्श्वनाथ मंदिर मेंअभिषेक एवं शांतिधारा हुई। माताजी ने अभिषेक व शांतिधारा के महत्वपर कहा कि श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से अभिषेक एवं शांतिधारा अवश्य करनी चाहिए।
इसके बाद। जैन भवन में ब्रह्मचारिणी प्रियंका दीदी द्वारा मंगलाचरण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि जब दीपक जलता है तो उसकी लौ हवा की दिशा में झुक जाती है, लेकिन जब हवा शांत होती है तो लौ भी स्थिर होकर प्रकाश देती है। ठीक इसी प्रकार से हमारा जीवन भी कर्मों की हवा से किप्रभावित होता है।
कर्म कहते हैं तो हम। हंसते हैं, कर्म कहते हैं तो रोते हैं, प्रेम और द्वेष भी कर्मों के अधीन ही उत्पन्न होते हैं।माताजी ने कहा कि हमें यह भ्रम रहता है कि हम सब कुछ स्वयं कररहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हमारा जीवन कर्मों के वशीभूत चल रहा है।

जैसे किसी नाटक या फिल्म में कलाकार निर्देशक के निर्देश पर अभिनय करता है। वैसे ही यह संसार भी एक रंगमंच है और हम सभी उसमें नाटक के पात्र हैं। आज हम संसार के नाटक में इतने रच-बस गए हैं कि अपने वास्तविक स्वरूप को भूल बैठे हैं। 

उन्होंने कहा धर्म हमें सिखाता है कि संसार को नाटक मानकर उसमें रहना चाहिए, उससे आसक्त नहीं होना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



