जैन संत पंचतत्व में विलीन हुवे मुनि मुक्ति सागर महाराज भक्तों ने नम आंखों से दी उन्हें विदायम सल्लेखना के 16वें दिन पूर्ण हुआ समाधि मरण

धर्म

जैन संत पंचतत्व में विलीन हुवे मुनि मुक्ति सागर महाराज भक्तों ने नम आंखों से दी उन्हें विदायम सल्लेखना के 16वें दिन पूर्ण हुआ समाधि मरण
—————————————
पिड़ावा:-

श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर में समाधिस्थ मुनि भूतबली सागर महाराज के शिष्य महा साधक मुनिराज मुक्ति सागर महाराज की यम संलेखना निर्यापक मुनि परम पूज्य 108 श्री मुनि सागर महाराज के सानिध्य में धर्म ध्यान पूर्वक चल रही थी यम सल्लेखना के 16वें दिन बाद वार रविवार को दोपहर में समाधि मरण हो गया है इनकी अन्तिम ढ़ोल यात्रा श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर से निकाली गई जिसमें नलखेड़ा, आगर, कानड़,ताकला, मोड़ी सुसनेर, सेमल खेड़ी, भवानी मण्डी, झालावाड़, झालरापाटन, सुनेल, कड़ोदिया ड़ोला मंगिसपुर रटलाई, कोटड़ी,खारपा,डोला आदि कई स्थानों से जैन समाज के श्रावक श्राविकाये व समाज जन बड़ी संख्या में भाग लिया।76 वर्षीय मुक्ति सागर महाराज ने पिड़ावा में गुरू भूतबली सागर महाराज के संघ में 2022मेंबडे मन्दिर में चातुर्मास किया था।

 

 

मुक्ति सागर महाराज का पूर्व का नाम गंगाधर (गंगा अप्पा) कर्नाटक के बेलगांव जिला गाडिकोप्पा नाम के गांव में जन्म हुआ था इनकी लोकिक शिक्षा तिसरी तक की थी मुक्ति सागर महाराज को तीन भाषाओं कन्नड़, हिन्दी, मराठी का ज्ञान था। संसारिक जीवन की माता का नाम सावित्री, पिता का नाम बसन्त अप्पा था मुक्ति सागर महाराज ने 2007में निज निवास कर्नाटक के बेलगांव जिला के गाडिकोप्पा गांव में ऐलक दीक्षा हुई।2011में देवास में भूतबली सागर महाराज से मुनि दीक्षा ली मुक्ति सागर महाराज शुरू से ही भूतबली सागर महाराज के संध में रहे मुक्ति सागर महाराज ने 7 वर्षों से सल्लेखना नियम का पालन कर रहे थे।मुनि श्री ने 23 और 24 दिसम्बर 2025 को मात्र छाछ का आहार लिया था और 25 व 26 दिसम्बर को जल का आहार लिया उसके बाद इन्होंने यम सल्लेखना धारण करते हुए चारों प्रकार के आहार का त्याग कर दिया। यम सल्लेखना के 16वें दिन मुक्ति सागर महाराज का दोपहर 3.00 बजे समता पूर्वक समाधि मरण हुआ। रविवार को उनके अंतिम संस्कार हेतु ड़ोल यात्रा शाम 4.00बजे श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर से प्रारंभ हुई जो कि मौहल्ला पिपली चौक खांण्डुपुरा ,नयापुरा होते हुवे ब्रम्हानंद सागर नसियां सूरजकुंड पहुंची डो़ल यात्रा में नगर भ्रमण के दौरान बड़ी संख्या में नगर वासी और समाज के लोग सफेद वस्त्रों में व बिना चप्पल जुतों के चल रहे थे।

 

 

मुनि श्री के अन्तिम दर्शन हेतु सड़कों पर तथा अपने अपने मकान की गेलरी व छत पर जमा थे।डोल यात्रा प्रमुख मार्गों से होकर अन्तिम संस्कार स्थल सुरजकुण्ड़ ब्रम्हानंद सागर नसियां क्षेत्र पर पहुंची जहां पर विधि विधान एवं मन्त्रोंचार के साथ मुनि श्री का अन्तिम संस्कार किया गया इस अवसर पर नगर सहित अन्य स्थानों से आये भक्तों ने भाग लेकर मुनि श्री श्रद्धा सुमन अर्पित कर विनयांजलि दी।

26 दिसम्बर 2025से जारी थी यम सल्लेखना की साधना

मुनि श्री मुक्ति सागर महाराज ने शारीरिक अक्षमता के चलते 26दिसम्बर 2025को अपने सभी दायित्वों को सन्त श्री मुनि सागर को निर्यापक मानकर चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम सल्लेखना शुरू कर दी थी जिन्होंने 16वें दिन वार रविवार को 3.00बजे उत्कृष्ट परिणामो के साथ सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण प्राप्त किया।

 

सन्तों का रहा सानिध्य
परम पूज्य 108 श्री मुक्ति सागर महाराज की समता पूर्वक समाधि मरण में परम पूज्य गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर , मुनि श्री 108विश्वभद्र सागर, निर्यापक मुनि सागर,ऐलक 105श्री मंथन सागर महाराज, आर्यिका 105श्री चिन्मय मति माताजी, क्षुल्लिका चेतन्य मति माताजी ससंघ अनेक सन्तों का सानिध्य मिला साथ में बाल ब्रह्मचारी धनसिंह भैया, ब्रम्हचारी सुरेश गुरू, पं.कल्याण जैन कोंटा बाल ब्रह्मचारी मंजुला दीदी, आदि त्यागी वृतियों को सानिध्य रहा और अन्त में पं.मुकेश शास्त्री सुसनेर,पं.राजकुमार जैन द्वारा पूजन विधि विधान से अन्तिम संस्कार किया गया।

प्रतिष्ठान बंद रख विन्यानजली पहुंचे नगरवासी

नगर में जैसे ही मुनि के समाधि मरण की खबर जैसे ही मिली समाज जनों में शोक की लहर छा गई और समाज जनों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर समाधिस्थ संत के अन्तिम दर्शन करने के लिए और डोल यात्रा के साथ ब्रम्हानंद सागर नसियां सूरजकुंड पहुंचे जहां पर मुनि संध व समाज जनों ने विन्यानजली अर्पित की गई।

      अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *