सत्यता और सरलता के साथ बनाए गए रिश्ते हमेशा मधुर बने होते हैं आदित्य सागर महाराज
केकड़ी
परम पूज्य मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने शुक्रवार को अपने उद्बोधन में कहा कि स्वार्थ और झूठ के साथ हमें किसी के साथ भी मित्रता नहीं करनी चाहिए, सत्यता और सरलता के साथ बनाए गए रिश्ते हमेशा मधुर बने रहते हैं।
श्रावकों का कर्तव्य है कि उन्हें अपनी-आगे आने वाली पीढ़ी को सरलता एवं सत्यता का पाठ अवश्य पढ़ाना चाहिए। सरल व्यवहार ही हमें जीवन में ऊंचाइयां प्रदान करेगा। हमारे जीवन में सत्यता सरलता तब तक नहीं होगी तब तक हम परोपकार नहीं कर पाएंगे।





हमें अपनी भावनाओं को स्वयं संभालना होगा, यदि हमारे अंदर त्याग की भावना नहीं है तो स्वाध्याय करना व्यर्थ है। जिनके मुंह में बगल में राम और मुंह में छूरी हो ऐसे लोगों से बचना चाहिए। यह लोग कभी सरल नहीं हो सकते। परिवार में कमरा चाहे अलग-अलग हो मगर छत एक होनी चाहिए। दूसरों के आश्रित होने के बजाय स्वयं पर आश्रित होना सीखें। दूसरों का सहारा तभी ले जब पूर्ण रूपेण शक्तिविहीन हो चुके हो क्योंकि दुनिया सहारा कम देती है मजाक ज्यादा उड़ाती है। मंजिल हमारी है तो मुश्किलें भी हमें हटानी पड़ेगी। हम कितने सरल एवं सहज हैं यह हमारे व्यवहार से पता चलता है।
पूज्य महाराज श्री ने कहा कि दिगंबर मुनियों के पास सरलता का भंडार भरा होता है। इनके पास जो भी जाता है उन्हें सहजता प्राप्त होने लगती है। यदि कोई व्यक्ति हमें गाली देता है तो गाली ना लें, तो पुनः वह गाली गाली देने के वाले के पास चली जाती है। हमें शाश्वत सुख की यात्रा में समाधि पूर्वक मरण करना हो तो पूरे जीवन पर्यंत सरलता व सत्यता को हमारा मूल स्वभाव बनाना होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
