श्री दिगंबर जैन पंचायत नसिया में मुनि आदित्य सागरजी महाराज ने युवाओं को दिया संदेशतनावपूर्ण दौर में नकारात्मकता को अनदेखा करें, यह सफल जीवन का मंत्र: आदित्यसागर

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• श्री दिगंबर जैन पंचायत नसिया में मुनि आदित्य सागरजी महाराज ने युवाओं को दिया संदेशतनावपूर्ण दौर में नकारात्मकता को अनदेखा करें, यह सफल जीवन का मंत्र: आदित्यसागर

 ब्यावर

श्री दिगंबर जैन पंचायत नसिया में जैन संत मुनिराज आदित्य सागरजी महाराज ने युवाओं को मानसिक शांति और संतुलित जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण दौर में नकारात्मकता को अनदेखा करना ही सबसे बड़ा जीवन मंत्र है। उन्होंने इससूत्र को “ॐ इग्नोर नमः ” की संज्ञा दी।

 

 

 

 

मुनि ने कहा कि आज व्यक्ति भौतिक रूप से तो आगे बढ़ रहा है, लेकिन जीवन से सुकून निरंतर दूर होता जा रहा है। उनके अनुसार सच्ची सफलता धन या पद में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति में निहित है। जहाँ सुकून है, वहीं वास्तविक सफलता है।

 

युवाओं को दीं प्रमुख सीख 

: मुनिश्री आदित्य सागर महाराज ने युवाओं से अपने जीवन की प्राथमिकताएं स्पष्ट ■ रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं का मुख्य लक्ष्य कॅरियर और व्यवसाय में स्थिरता प्राप्त करना होना चाहिए। धर्म के विषय में उन्होंने स्पष्ट किया कि उसमें उतनी ही दृढ़ता हो, जिससे समाज में वैमनस्य या कटुता उत्पन्न हो रही है।

 

 

 

ऐसे रहें खुश: तनाव का सबसे बड़ा कारण दिखावा, इसे दूर करें

मुनिश्री ने कहा कि आज तनाव का सबसे बड़ा कारण दिखावा है। लोग दूसरों से आगे दिखने की होड़ में अपने आत्मसम्मान और मानसिक शांति खो बैठते हैं। उन्होंने कहाकि जितना दिखावे से दूर रहेंगे, उतना हीतनाव से मुक्त रहेंगे।

रिश्तों में घटता धैर्य वर्तमान समय में रिश्तों की अस्थिरता पर चिंता व्यक्त करते हुए मुनि श्री ने कहा कि छोटी-छोटी बातों

पर बढ़ती नाराजगी का मुख्य कारण धैर्यकी कमी है, जिसमें खान-पान की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 

 

 

 

धर्म और विज्ञान पर दृष्टिकोण | 

धर्म तर्क और प्रश्नों से कभी नहीं डरता | विज्ञान अभी खोज की प्रक्रिया में है, जबकि धर्म पूर्ण है और मानव जीवन को सही दिशा देने वाला है। अहिंसा पर अपने विचार रखते हुए मुनि श्री ने बताया कि अहिंसा केवल दूसरों को कष्ट न देना

ही नहीं, बल्कि स्वयं से प्रेम करना और दूसरों को जीने का अवसर देना भी अहिंसा का ही स्वरूप है

 

 

 

 मुनिश्री ने कहा जीवन एक सुंदर पुस्तक की तरह है। यदि उसका एक पन्ना गलत लिखा है। तो पूरी पुस्तक को नष्ट नहीं करना चाहिए नकारात्मकता को इग्नोर करे और आगे बढ़ते रहे।

          संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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