गुरुदेव ने कहा था लोगों को संतुष्ट करने कभी मत जाओ, धर्मक्षेत्र में धर्म के लिए निष्ठा आवश्यक है, धर्म भावना जगाओ प्रमाण सागर महाराज |
दमोह
जिले के प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र कुण्डलपुर में बड़े बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ससंघ का सानिध्य पाने श्रद्धालु भक्तों काआना जारी रहा।
“रविवार को बड़े बाबा का अभिषेक करने के लिए भक्तों की भीड़ रही। मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने शंका समाधान कार्यक्रम में कहा कि बार-बार व्रत की भावना भाना चाहिए, व्रत का स्मरण सदैव करना चाहिए।
मौजूद ब्रह्मचारिणी दीदी ने शंका रखी की मुनि श्री आपने बड़े बाबा की इतनी एनर्जी कैसे पाई ।मुनिश्री ने समाधान देते हुए कहा अपने आप को बड़े बाबा के चरणों में अर्पित कर दिया वहां जो बरसरहा था आत्मसात कर लिया।
णमोकार मंत्र के विषय में की गई।शंका का समाधान करते हुए मुनि श्री ने कहा यह स्वयं सिद्ध मंत्र है। सिद्ध नहीं करना पड़ता, मंत्र जपना होता है। जप लिया तो काम बन गया।
इसमें कोई भी बीजाक्षर नहीं सीधा-साधा मंत्र है। इसे सीधा पढ़ो या उल्टा पढ़ो जैसे पढ़ना हो पढ़ो किसी भी स्थिति में पढ़ो मारण उच्चारण में इसका कोई प्रयोग नहीं। इस मंत्र के एक अक्षर पढ़ने से 60 सागर के कर्म का क्षय होता एक
बार णमोकार मंत्र जपने से 500 सागर के कर्म का क्षय हो जाता है।जो णमोकार मंत्र जप ले उसका उद्धार होता है।
एक और ब्रह्मचारिणी दीदी ने मुनिश्री से निवेदन किया कि गुरुदेव कुण्डलपुर आकर आपको इतना तो समय देना चाहिए जिससे हम सारी बहनें संतुष्ट हो सके। मुनिश्री ने उपस्थित जनसमूह से ही पूछ बैठे यह लोग क्या कभी संतुष्ट हो जाएंगे। मुनिश्री ने कहा कभी संतुष्ट होना नहीं। मुनिश्री ने बताया कि गुरुदेव ने कहा था लोगों को संतुष्ट करने कभी मत जाओ। उनकी प्यास जगाने जाओ। धर्म क्षेत्र में धर्म के लिए निष्ठा आवश्यक है, धर्म भावना जगाओ। निष्ठा गहरीकीजिए, बच्चों में भी कर्तव्य बोध जगाइए।
मुनिश्री का विहार जबलपुर की और
पांच दिवसीय बड़े बाबा के चरणों में प्रवास के उपरांत मुनिश्री संघ का बिहार बांदकपुर की ओर हो गया। रात्रि विश्राम देवडोंगरा ग्राम में हो रहा। संभवतः मुनिश्री
संस्कारधानी जबलपुर की ओर बढ़ रहे हैं। जहां 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन
किया जा रहा है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312









