मंगल प्रवेश • वीरोदय तीर्थ पर आचार्य आर्जव सागर महाराज ससंघ की अगवानी हमें संतान को संपत्ति नहीं, संस्कार देने की चिंता करनी चाहिए: आचार्य श्री
| बड़ोदिया
वीरोदय तीर्थ स्थित जैन मंदिर में बुधवार को धर्मसभा में संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 आर्जव सागर जी
महाराज ने कहा कि अभिभावकों को संतान को संपत्ति नहीं, संस्कार देने की चिंता करनी चाहिए।
उन्होंने। कहा कि जब तक नई पीढ़ी में अच्छे संस्कार नहीं होंगे, तब तक हमारी धरोहर सुरक्षित नहीं रह। सकती।धर्म सभा में मौजूद बुजुगों से। उन्होंने आग्रह किया कि वे संकल्प लें कि बच्चों को विरासत में भले ही संपत्ति न दें, लेकिन ऐसे संस्कार। जरूर दें कि उनके जाने के बाद भी परिवार में उनकी कीर्ति बनी रहे।


आचार्य श्री ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि न्याय नीति से कमाएं विवेक से खर्च करें और संतोषी। जीवन जीएं।
महापुरुषों के चरित्र से प्रेरणा लेने की नसीहतः दी।
मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ की तर्ज पर एक नया नारा देते हुए कहा कि ‘तुम मुझे समय दो, मैं तुम्हें भगवान बनने का रास्ता दूंगा।’। इसी तरह उन्होंने बाल गंगाधर
तिलक के नारे ‘स्वराज मेरालेकर रहूंगा’ को नई परिणति का
नारा देते हुए कहा कि- ‘आत्मा से। परमात्मा बनना मेरा जन्मसिद्ध। अधिकार है और मैं एक दिन अपनी आत्मा का कल्याण करके। रहूंगा।’ यदि हम इस तरह के भावों


को अपने जीवन में प्रशस्त होगा।

इससे पूर्व आचार्य श्री के। वीरोदय तीर्थ पर पहुंचने पर तीर्थ
कमेटी उपाध्यक्ष राजेश गांधी,शास्त्री पीयूष जैन व एवीएस
महिला मंडल ने मंगल अगवानी की। आचार्य संघ को कमेटी के उपाध्यक्ष राजेश गांधी ने तीर्थ के बारे में जानकारी दी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
