धर्मतीर्थ अतिशय क्षेत्र में हुआ भव्यातिभव्य गुरू शिष्य मिलनजगतगुरु ने अपने प्रियाग्र शिष्य को अपने ही सिंहासन पर लेकर हृदय से लगाया।

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धर्मतीर्थ अतिशय क्षेत्र में हुआ भव्यातिभव्य गुरू शिष्य मिलनजगतगुरु ने अपने प्रियाग्र शिष्य को अपने ही सिंहासन पर लेकर हृदय से लगाया।

        धर्मतीर्थ 

धर्मतीर्थ अतिशय क्षेत्र में हुआ भव्यातिभव्य गुरू शिष्य मिलन इन क्षणों मेंजगतगुरु ने अपने प्रियाग्र शिष्य को अपने ही सिंहासन पर लेकर हृदय से लगाया।ऐसे अनूठे वात्सल्य के दृश्य देखकर भक्तों ने भावपूर्ण जयघोषों से आकाश गुंजायमान किया

 

 

 

 

इस अवसर पर कुंथुसागर महाराज ने कहा ऐसा गुरू शिष्य का वात्सल्य मिलन केवल नंदीसंघ में ही देखने को मिलेगा आचार्य गुप्तिनंदी  गुरुदेव ने कहा-जगतगुरु गणधराचार्य कुन्थुसागरगुरुदेव के आगमन से आज धर्मतीर्थ क्षेत्र धन्य हुआ।

 

रविपुष्यामृत के सिद्ध मुहूर्त में 51फिट ऊंची सिद्ध प्रतिमा का सिद्ध शिलान्यास महोत्सव गणिनी आर्यिकाश्री आस्थाश्री माताजी के मुख्य निर्देशन में जगतगुरु के अगवानी की सभी तैयारियां की गई।

 

 

 

 सुबह की कडकडाती सर्दी में पूज्य जगतगुरू गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुन्थुसागरजी गुरुदेव का ससंघ का मंगल आगमन धर्मतीर्थ अतिशय क्षेत्र पर हुआ जिनकी भव्यातिभव्य अगवानी उनके प्रियाग्र शिष्य क्रांतिकारी राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुप्तिनंदी गुरुदेव ससंघ,आचार्य श्री सूर्य सागरजी व गणिनी आर्यिकाश्री सौभाग्यमती माताजी ससंघ ने किया।

 

 

 

महामिलन के क्षणों मेंआचार्य गुप्तिनंदी ने अपने दीक्षा गुरु की सबसे पहले तीन परिक्रमा की, तीन बार उठ बैठकर नमोस्तु किया, साष्टांग दंडवत प्रणाम किया।पंचामृत के साथ विभिन्न चन्दन के द्रव्यों से और अपने आसुओं से गुरुवर का पादप्रक्षालन किया।रत्न वृष्टि की।त्रयभक्ति पूर्वक मंगलप्रवेश कराया। जो इतिहास के पन्नों पर अमिट रहेगा यह क्षण अपने आप में एक अविस्मरणीय क्षण थे।

 

  भव्य थी शोभायात्रा 

नगर में निकली शोभायात्रा भव्य थी शोभायात्रा में घोड़े, ऐरावत हाथी, बैंडपथक, ध्वज पथक, लेझिम पथक, झांझ पथक, छत्री पथक भक्ति नृत्य करते हुए चल रहे थे।

 

 

गुरु शिष्य के मिलन को देखने के लिए आये हजारों भक्तों ने 10क्विंटल से अधिक विभिन्न पुष्पों की वर्षा की।संपूर्ण धर्मतीर्थ क्षेत्र को जगतगुरु के अगवानी में दुल्हन की तरह सजाया गया।

 

 

 

अगवानी के क्षणों में 25फिट ऊँचे गुरू शिष्य आचार्य श्री के कटआउट ने सबका मनमोह लिया। और सबका ध्यान अपनी और खींचा इसके साथ ही111फिट का आचार्य श्री के वात्सल्य का चित्र रांगोली से बनाया गया। इस अनुपम समागम की बेला में 

नवजिन शान्ति जिनालय के बी

बाहर108चांदी की थालियों में अनेकों प्रकार के चन्दन वा वनौषधियों से जगतगुरु आचार्य श्री के चरण चिन्हित स्वागत किया गया।

 

बन रहे सिद्ध मंदिर का मुख्य शिलान्यास एवं आचार्य श्री को माला व शास्त्र भेंट श्रीमती मिलन अमित सुमित निकुंज जैन परिवार हैदराबाद ने किया वेदी निर्माण पुण्यार्जक श्री जिनेन्द्र सौ.हीरामणी राजेश धीरज विकास जैन परिवार ने नंद्यावर्त शिला की स्थापना की।वहीं मूर्ति निर्माण पुण्यार्जक-श्री अनिल-सौ.ज्योति गोधा, सौ.श्रद्धा राजेश बाकलीवाल ने वर्धमान यंत्र की स्थापना कीअचल यंत्र की स्थापना श्री मधुकर-सौ.सिन्धुमती, विशाल कोमल सैतवाल परिवार बैंकाक की ओर पूज्य आचार्य गुरुदेव के करकमलों से हुई।

 

 

 

 

इससे पूर्व जगतगुरु आचार्य श्री का पादप्रक्षालन धर्मतीर्थ के प्रवक्ता परम गुरू भक्त श्री नितिन नखाते ने किया साथ ही उन्होंने श्री लक्ष्मी वैभव यंत्र की स्थापना की। सिद्ध शिला की स्थापना के साथ जगतगुरु आचार्य श्री को पीछी भेंट श्री प्रवीण सौ.विद्या, लोकेश, देवेश चतुर परिवार मुंबई ने किया।कमंडल भेंट आयुष जैन परिवार रोहतक ने किया।शास्त्र भेंट मदनलाल साहिल पाटनी परिवार ने किया।

 

 

आयोजन के क्षण में आगंतुकों के लिए धर्म प्रभावना का वितरण किया गया

इसके अलावा अनेकों महादानी गुरू भक्तों ने आठों सिद्ध शिला नवरत्न व सिद्ध चक्र यंत्र को स्थापित किया

विभिन्न प्रकार के धातु, रत्न, धान्य, वस्त्र, माला आदि से पूजा करते हुए सिद्ध शिलान्यास किया।

 

 

इस अवसर पर छत्रपति संभाजीनगर से बस व्यवस्था पारस प्रतीक नीरज पांडे परिवार की ओर से हुई। महाप्रसादी श्री संजय विजय पापडीवाल परिवार छ.संभाजीनगर, की और से हुई।5जनवरी को धीरज समता पाटनी परिवारऔर 3जनवरी को श्रीराजेन्द राखी, बाकलीवाल परिवार ने महाप्रसादी देने का लाभ लिया। क्षेत्र के अध्यक्ष आर्किटेक्ट श्री चन्द्रशेखर पाटनी जी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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