जैन सम्प्रदाय दो महान संत मुनि श्री आदित्य सागर महाराज एवम महाश्रमण मुनि का हुआ महामिलन 

धर्म

जैन सम्प्रदाय दो महान संत मुनि श्री आदित्य सागर महाराज एवम महाश्रमण मुनि का हुआ महामिलन 

    ब्यावर 

रविवार की बेला जिन शासन की प्रभावना एक नया आयाम दे गई जो जैन एकता का एक जीवंत अध्याय बन गई। यह पल था ब्यावर के नजदीक खरवा ग्राम में श्रुत संवेगी पूज्य मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज एवम तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी महाराज ससंघ का महामिलन  निश्चित रूप से यह समागम एक नया इतिहास बन गया। 

 

यह मिलन रविंद्र जैन का वह कथन सार्थक कर गया हम नहीं दिगंबर ,श्वेतांबर, तेरहपंथी थानकवासी हम एक धर्म के अनुयायी, हम एक धर्म के विश्वासी आपस में कोई मतभेद न हो।

 परम पूज्य महाश्रमण मुनि किशनगढ़ की और बिहार कर रहे हैं जहां विगत दिनों में किशनगढ़ के आर के कम्युनिटी सेंटर में गुरुवर का धार्मिक आयोजन संपन्न होना है। वही श्रुत संवेगी मुनिश्री आदित्य सागर महाराज ब्यावर प्रवास करते हुए धर्म प्रभावना हेतु भीलवाड़ा राजस्थान की ओर मंगल विहार कर रहे हैं।

 

 

 

 

एक और जहां श्रुत संवेगी मुनिश्री 108 आदित्य सागर महाराज जहां आधुनिकता की दौड़ में युवा धर्म से विमुख हो रहा था उन्हें अपने मोटिवेशन के द्वारा अपने संबोधन के द्वारा संस्कारों का प्रस्फुटन कर धर्म मार्ग में लगाने का कार्य किया।

 

आचार्य महाश्रमण जी का प्रकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने, नैतिक मूल्यों की स्थापना करने और हर व्यक्ति को आत्म-अनुशासन तथा सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जीने के लिए प्रेरित करता है। 

   

    आदित्य सागर महाराज 

  श्रुत संवेग मुनिश्री आदित्य सागर महाराज के विषय में प्रकाश डालें तो वे युवाओं के लिए एक पर्याय है 

मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज अपने तप, ज्ञान और व्यावहारिक जीवन-दर्शन से लोगों को आत्म-सुधार, सकारात्मक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरित करते हैं, जिसमें छोटे-छोटे कदम उठाकर जीवन में बड़े बदलाव लाने का संदेश प्रमुख है।

संस्कार और शिक्षा पर जोर:

 उनका मानना है कि समाज का विकास संस्कारों और शिक्षा के सही मेल से होगा, न कि केवल आधुनिक दिखावे से; वे युवाओं को पाश्चात्य संस्कृति से बचकर संस्कारों की ओर लौटने की प्रेरणा देते हैं।

 

आलोचना का सामना:

 वे कहते हैं कि आलोचना से घबराना नहीं चाहिए, न ही किसी की आलोचना करनी चाहिए; अपने काम पर ध्यान दें और अपनी लाइन लंबी करें, आलोचक अपने आप शांत हो जाएंगे।

  

 जीवन के सही मूल्यों का संदेश: 

वे अपने प्रवचनों के माध्यम से जीवन के वास्तविक मूल्यों को समझाते हैं और लोगों को सकारात्मक व अर्थपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं। 

 

 अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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