साधुओं की संगति और सन्नधि से हमारे अंदर वैराग्य का भाव उमड़ता है,और पथ प्रशस्त होता है”प्रमाण सागर महाराज
बलेह
“साधुओं की संगति और सन्नधि से हमारे अंदर वैराग्य का भाव उमड़ता है,और पथ प्रशस्त होता है” उपरोक्त उदगार संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कुंडलपुर की ओर विहार करते हुये बलेह ग्राम में प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये।मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि संघ रहली के बड़ेबाबा के दर्शन करते हुये बलेह ग्राम जो कि आर्यिका रत्न मृदुमति माताजी एवं बाल ब्र. पुष्पा दीदी एवं मुनि श्री वियोग सागर महाराज की जन्मस्थली है यहा पर आकर के मुनिसंघ ने चारों जिनालय के दर्शन किये एवं दोपहर में शंकासमाधान के पश्चात 12 कि. मी. आगे मंगल विहार बमनौरा ग्राम पंचायत की ओर हुआ।
इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा हमने बचपन से सुना है,कि जैसे “सूरज के खिलने से कमल खिलता है वैसे ही गुरूओं के सानिध्य से आप लोगों के चहरे खिले हुये है” उन्होंने कहा कि देव शास्त्र और गुरु यह तीन हमारे धर्म के आधार है इनका आश्रय लेकर हम अपनी धार्मिक भावनाओं को और अधिक प्रगाढ़ बना कर जीवन का उत्थान कर सकते है,आप सभी लोग बड़े भाग्यशाली हो आपको देव गुरु शास्त्र का सानिध्य प्राप्त हो रहा है,और यह बुन्देलखण्ड की धरा इस अर्थ में बहुत ही बड़ी भाग्यशाली है कि यहा पर लगातार पचास वर्षों तक गुरुदेव का आशीष मिला और उन्होंने इसे सीच सीच कर हरा भरा बना दिया। “जीवन भावनाओं से संचालित होता है।
“बलेह गांव भले ही छोटा हो लेकिन यहा भावना बहूत बड़ी है “छोटे गांव से त्यागी वृतियो का निकलना इस बात का संकेत है कि यहा पर धर्म के प्रबल संस्कार है, उन्होंने कहा कि मोक्षमार्ग को अंगीकार किये बिना जीवन का उद्धार नहीं है हमेशा एक ही भावना रखना चाहिये कि मैं जब तक पिच्छी ग्रहण न करूं तब तक पिच्छीधारिओं के पीछे लगा रहुं उन्होंने सभी को आशीर्वाद दिया इस अवसर पर बाल ब्र. पुष्पा दीदी एवं सुनीता दीदी सहित ग्रामवासियों ने श्री फल अर्पित कर मुनि श्री से रूकने की प्रार्थना की कार्यक्रम का संचालन बाल ब्र. अभय भैया आदित्य ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312







