गुरु जी की समाधि के पश्चात उनके संदेश को जन जन तक पहुंचाने का कार्य करना ही उनके प्रति सच्ची गुरु भक्ती है”संभव सागर महाराज
विदिशा
गुरु जी की समाधि के पश्चात उनके संदेश को जन जन तक पहुंचाने का कार्य करना ही उनके प्रति सच्ची गुरु भक्ती है”उपरोक्त उदगार मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ने स्टेशन जैन मंदिर में व्यक्त किये उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का “स्वर्ण प्राशन” को विदिशा नगर के प्रत्येक बच्चों तक पहुंचाने का जो संकल्प आप लोगों ने लिया है,उसमें सभी को उत्साह नजर आ रहा है।
प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया उपरोक्त संद्रभ में जिला महिला बाल विकास अधिकारी श्रीमति विनीता कासवा ने आकर मुनिसंघ से आशीर्वाद लिया और वार्ता की। उन्होंने अपना उत्साह प्रकट करते हुये कहा कि यह जो कार्य निःशुल्क बच्चों को स्वर्णप्राशन पिलाने का किया जा रहा है,उसमें हमारे विभाग की ओर से हम लोग स्वंय चलकर अपनी सभी 168 आंगनबाड़ी के माध्यम से दस हजार बच्चों को स्वर्ण प्राशन पिलाने के लिये अपनी ओर से तथा अपनी पूरी टीम की ओर से सहयोग देने का वचन देते है।
मुनि श्री ने उनके इस सहयोग के लिये आशीर्वाद दिया तथा कहा कि इस प्रकार से प्राथमिक और माध्यमिक शाला के चालीस हजार बच्चे तथा दस हजार बच्चे आंगनबाड़ीयो के इस प्रकार पचास हजार बच्चों तक यह गुरुजी का आशीर्वाद के साथ स्वर्ण प्राशन जब उनके गले में पहुंचेगा तो न जाने कितने बच्चे जिनकी बुद्धी कमजोर हो रही हो उनकी बुद्धि पुनः सामान्य हो जाये, ऐसे ही कितने बच्चों की हड्डियां जो कमजोर हों वह भी ठीक हो जाए तथा उनके शारीरिक विकास की क्षमता बढ़ जाये। मुनि श्री ने समाज के सभी महिलामंडलों तथा युवा संगठनों को आव्हान किया कि इस कार्य में ज्यादा से ज्यादा युवक युवतियां तथा महिलायें अपना योगदान दें उस दिन सिर्फ आपको अपने सेंटर तक जो टीम आपकी बनाई जाएगी उनको दवा पिलाकर आना है और अपनी अपनी सैल्फी और फोटो को अपने अपने वाट्सएप ग्रुप में शेयर करोगे तो आपको भी खुशी मिलेगी तथा अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण करोगे,हालांकि इस कार्य में सभी युवाओं में बहूत उत्साह नजर आ रहा है।
इधर मुनि श्री ने प्रातःकालीन प्रवचन सभा में सूक्ष्म एवं निगोदिया जीव की चर्चा करते हुये कहा कि ज्ञानावरणीय कर्म के पास उसके पूर्ण ज्ञान को ढंकने की शक्ति नहीं है सूक्ष्म निगोदिया जीव जैसे चींटी और वृक्ष की जड़ों में भी ज्ञान है। मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक संसारी जीव को इच्छायें होती है मुनि श्री ने कहा कि आप जैसी हैबिट्स डाल लो वैसी हैबिट्स आ जाती है जैसे आप प्रतिदिन 11 बजे भोजन करते है तो उसी समय पर आपको भूख का अहसास होगा,मुनि श्री ने कहा कि हर प्राणी के अंदर आहार संज्ञा होती है,अर्थात भोजन करने की इच्छा होती है,मुनि श्री ने कहा कि भोजन बनाने की क्रिया में सूर्य का प्रकाश कितना जरूरी है यह वह वनस्पति भी जानता है और आजकल हमारे घरों को हमने ऐसा बना लिया है कि उसमें सूर्य का प्रकाश नहीं रहता।
मुनि श्री ने कहा कि यदि आपके भोजन में सूर्य का प्रकाश और शुद्ध आक्सीजन न मिले तो वह गुणकारी नहीं है दोनों ही अत्यंत आवश्यक है, जैसे कुकर में हवा पानी होगी तभी सीटी बजेगी उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि किसी भी पौधे को यदि कवर कर दो तो वह पीला पड़ जायेगा।
उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान तो कह रहा हे कि विटामिन डी सूर्य के प्रकाश से ही मिलता है,और उसका कोई शुल्क नहीं नहीं है लेकिन आजकल के घरों में वह सूर्य प्रकाश भी गायब हो गया है इसलिये शुद्ध आक्सीजन की भी कमी हो गई है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312








