जीवन जीने का – इससे अच्छा दूसरा कोई फार्मूला नहीं हो सकता..सब कुछ अच्छा है और कुछ भी अच्छा नहीं है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
औरंगाबाद/गाजियाबाद –
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ पर विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हो रहें हैं उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जीवन जीने में निराश होने का एक ही कारण है – दूसरों से ज्यादा अपेक्षा करना और जीवन के यथार्थ को स्वीकार नहीं कर पाना। जीवन जीने के लिए आशा एक संजीवनी जड़ी बूटी है और निराशा जीते जी मृत बना देती है।
निराश व्यक्ति के अन्दर मानसिक शिथिलता आ जाती है और वह अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हो जाता है। इसलिए जीवन के इस यथार्थ कड़वे सच को हमेशा स्वीकार करो — संयोग-वियोग, लाभ-हानि, बुढ़ापा-मौत, ये जन्म के साथ शुरू होता है और अन्तिम स्वांस तक चलता रहता है। यदि हमने इन्हें स्वीकार कर लिया तो जीवन में निराशा हम पर एकाधिकार नहीं जमा पायेगी।
जब हम स्वार्थ छोड़कर, निस्वार्थ का जीवन जीते हैं या निराशा से मुक्त होकर आशा का जीवन जीते हैं, तो जीवन के हर कार्य में उत्साह बढ़ने लगता है और जीने का हौसला बुलंद हो जाता है। 
जीवन को एक खेल समझ कर जीयें और हार जीत को स्वीकार करें। यदि कोई गलती हो जाए या कोई काम बिगड़ जाये तो उसे दिल में जगह ना दें, बल्कि उससे सीख लेकर आगे उससे अच्छा करने का जज्बा और जुनून पैदा करें, तभी हम यह जीवन जी पायेंगे
……!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





