तीर्थंकर बनने तीन गुण आवश्यक निरोग सागर महाराज
गुना
परम पूज्य मुनि श्री 108 निरोग सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए भक्तों को संसार भावना का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि इस अनश्वर संसार में सभी प्राणी अनंत बार जन्म और मरण के चक्र से गुजर चुके हैं। 4 लाख 84000 योनियों में हमने बार-बार जन्म लिया, परंतु धर्म और गुरु की शरण न लेने के कारण मोक्ष का मार्ग अब तक नहीं मिला।
पूज्य मुनि श्री ने कहा कि यदि हम देव शास्त्र और गुरु की शरण में आकर दो प्रतिमाओं का व्रत धारण कर लेते तो अधिक से अधिक आठ भवों में, और शुभ संकल्पों के साथ मात्र दो भवों में मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कर्मों के अनुसार ही हमारा भविष्य निर्धारित होता है। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, और सम्यक चरित्र को अपनाकर ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। 
मुनि श्री ने बताया कि तीर्थंकर बनने के लिए तीन आवश्यक गुण वीतरागता, सर्वज्ञता और हितोपदेशी होने चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि यह दुर्लभ मानव जीवन उत्तम कुल सदगुरु का सानिध्य अनंत पुण्यों का परिणाम है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


