श्रीमद जिनेंद्र विमान उत्सव • महिदपुर में आयोजन, श्रीजी को रजत पालकी में विराजित कर कराया नगर भ्रमणजहां से दुनिया की सोच खत्म होती है, वहां सेभारतीय संस्कृति शुरू होती है: मुनिश्री सुधासागर महाराज

धर्म

श्रीमद जिनेंद्र विमान उत्सव • महिदपुर में आयोजन, श्रीजी को रजत पालकी में विराजित कर कराया नगर भ्रमणजहां से दुनिया की सोच खत्म होती है, वहां सेभारतीय संस्कृति शुरू होती है: मुनिश्री सुधासागर महाराज
महिदपुर / ईसागढ़
मंगलवार को मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में महिदपुर में वार्षिक विमान उत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के मंगल प्रवचन हुए। शाम को मुनिश्री संघ का ईसागढ़ की ओर विहार हो गया।

 

 

मंगल प्रवचन देते हुए महाराज श्री कहा कि चलते-चलते। थक जाएं इसके बाद भी आत्मा कहती है अभी बहुत कुछ बाकी है। जहां   दुनिया की सोच समाप्त होती है, वहीं से भारतीय संस्कृति प्रारंभ होती है। मनुष्य बाहर सुख खोजता है- कभी चंद्रमा, कभी भौतिक साधनों में लेकिन उसकी स्थिति उस मृग के समान है जो कस्तूरी की सुगंध के लिए जंगल-जंगल भटकता है, जबकि वह सुगंध उसकी अपनी नाभि में होती है। यही दशा संसारी जीव की है।

 

महिदपुर में मुनि संघ के सान्निध्य में भगवान जिनेन्द्र देव की
भव्य शोभायात्रा विमान जी के साथ निकाली गई। श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर श्रीफल भेंट किए। इस अवसर पर जगत कल्याण की भावना से महा शांतिधारा की गई,

 

महिलाओं ने खेली चांचड़, कस्बे में जगह-जगह तोरण द्वार बनाकर की आकर्षक सजावटआज ईसागढ़ में भव्य मंगल प्रवेश व वेदी प्रतिष्ठा अशोकनगर जिले के छोटे से गांव महिदपुर ने श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के आगमन पर ग्रामवासियों ने ऐतिहासिक स्वागत किया। 51 स्वर्ण थालों, चांदी की चौकी और 51 स्वर्ण कलशों से मुनिश्री के पावन चरणों का प्रक्षालन किया गया। यह दृश्य अत्यंत दुर्लभ और भावविभोर करने वाला रहा।

 

 

मुनिश्री महिदपुर से विजयपुरा होते हुए पद विहार कर ईसागढ़ पधारेंगे। बुधवार सुबह श्री दिगंबर जैन नाका मंदिर ईसागढ़ में वेदी प्रतिष्ठा समारोह आयोजित होगा, जो बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य मुकेश भैया के निर्देशन में संपन्न होगा। मुनि संघ का नगर में भव्य मंगल प्रवेश होगा, जिसकी। तैयारियां ईसागढ़ जैन समाजद्वारा व्यापक स्तर पर की जा रही हैं।

 

 

दुख के पर्वत में भी विचलित नहीं हुए श्रीराम
मुनिश्री ने श्रीराम के जीवन से प्रेरणा देते हुए कहा कि वनवास के समय माता सीता का हरण हो जाने पर भी श्रीराम विचलित नहीं हुए और न ही माता कैकेयी को दोष दिया। ऐसे महापुरुषों के जीवन से हम हर क्षण आनंद प्राप्त। कर सकते हैं।

 

 

धर्मसभा में मुनिश्री। ने कहा कि अदृश्य शक्ति तकपहुंचने के लिए श्रद्धा का आलंबन आवश्यक है। भगवानको देखने के लिए प्रह्लाद जैसी। दृष्टि चाहिए। हिरण्यकश्यप ने। स्तंभ में भगवान खोजे और श्रद्धा के कारण वहीं से भगवान प्रकट हुए। इसी प्रकार मूर्तियों में कोई पाषाण देखता है, तो श्रद्धालु को. भगवान के दर्शन होते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *