तपस्वी सम्राट आचार्य श्री 108 सन्मति सागर महाराज के समाधि दिवस पर नमन सन1991 रामगंजमंडी वर्षा योग से जुड़ी स्मृति
ऐसे महान संत जिनकी साधना की तपस्या की जितनी महिमा कही जाए कम होगी रामगंजमंडी नगर का परम सौभाग्य रहा गुरुदेव का वर्षा योग सन 1991 का रामगंज मंडी नगर को मिला जो अविस्मरणीय कहा जायगा
आचार्य श्री के भक्त श्री मिथुन मित्तल ने किया अपने अनुभव सांझा
परम पूज्य आचार्य गुरुदेव श्री 108 सन्मति सागर महाराज के वर्ष 1991 के चातुर्मास में गुरुदेव की सेवा में रहे श्री श्री मिथुन मित्तल जो उसे समय लगभग 15 वर्ष के थे वह आज के समाधि दिवस पर हमें अनुभव बताते हुए कहते हैं कि आचार्य श्री के समक्ष बैठने उनकी सेवा करने में मुझे एक अलग ही ऊर्जा मिलती थी उनकी साधना देखते हुए बनती थी उनका कहना था कि वह जब साधना करते थे तो उनका तप तेज देखते हुए बनता था। उन्होंने बताया कि आचार्य श्री एक दिन हर एक दिन उपवास करते थे उनके अन्न का त्याग था आहार में वह सिर्फ केले की रोटी और मट्ठा ही लेते थे।
उन्होंने कहा मुझे और मेरे साथ ही रहे जितेंद्र वेद को कहां की सम्मेद शिखर तीर्थ की वंदना करकेआओ यह गुरुदेव का ही प्रताप था कि मैं शिखरजी तीर्थ की वंदना कर आया आज भी गुरुदेव मेरी स्मृति में बने हुए हैं वह बताते हैं कि गुरुदेव जहां भी जाते थे उनके चरण चिन्ह छप जाते थे। ऐसे महामना की सेवा करने उनके समीप बैठने का जो अवसर मुझे मिला है वह में शब्दों में वर्णन नहीं कर सकता।
वह कहते हैं कि शायद उन्हीं के ही संस्कार और उन्हें का आशीर्वाद दे कि आज में धर्मपथ पर चल रहा हूं एक महान संत का जितना वर्णन लिखा जाए कम होगा।

जब गुरुदेव का वर्षा योग हेतु रामगंज मंडी नगर में प्रवेश हुआ था तब इंद्रदेव भी जमकर बरस रहे थे और जैसी ही गुरुदेव ने शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के बाहर जमकर बरसे शायद ऐसा लग रहा हो कि इंद्रदेव भी उनकी अगवानी में आए हो और उनके चरणों को धोकर उनके चरण रज अपनी मस्तक पर लगा रहे हो।
समाज के वरिष्ठ व्यक्तियों ने कुछ छाया चित्रों का संकलन दिगंबर जैन मंदिर में रखा हुआ था जिसे स्कैन करा कर संकलित किया है।
कुछ पंक्तियां गुरु चरणों में
स्वयं तिर गए
लाखों को तारा
आज इस धरती पर
गुरुदेव सन्मति सागर जी
के शिष्यों का हमे सहारा
आप ना होतपस्वी सम्राट आचार्य श्री 108 सन्मति सागर महाराज के समाधि दिवस पर नमन
सन1991 रामगंज मंडी की वर्षा योग से जुड़ी स्मृति
ऐसे महान संत जिनकी साधना की तपस्या की जितनी महिमा कही जाए कम होगी रामगंजमंडी नगर का परम सौभाग्य रहा गुरुदेव का वर्षा योग सन 1991 का रामगंज मंडी नगर को मिला जो अविस्मरणीय कहा जायगा
आचार्य श्री के भक्त श्री मिथुन मित्तल ने किया अपने अनुभव सांझा
परम पूज्य आचार्य गुरुदेव श्री 108 सन्मति सागर महाराज के वर्ष 1991 के चातुर्मास में गुरुदेव की सेवा में रहे श्री श्री मिथुन मित्तल जो उसे समय लगभग 15 वर्ष के थे वह आज के समाधि दिवस पर हमें अनुभव बताते हुए कहते हैं कि आचार्य श्री के समक्ष बैठने उनकी सेवा करने में मुझे एक अलग ही ऊर्जा मिलती थी उनकी साधना देखते हुए बनती थी उनका कहना था कि वह जब साधना करते थे तो उनका तप तेज देखते हुए बनता था। उन्होंने बताया कि आचार्य श्री एक दिन हर एक दिन उपवास करते थे उनके अन्न का त्याग था आहार में वह सिर्फ केले की रोटी और मट्ठा ही लेते थे।
उन्होंने कहा मुझे और मेरे साथ ही रहे जितेंद्र वेद को कहां की सम्मेद शिखर तीर्थ की वंदना करकेआओ यह गुरुदेव का ही प्रताप था कि मैं शिखरजी तीर्थ की वंदना कर आया आज भी गुरुदेव मेरी स्मृति में बने हुए हैं वह बताते हैं कि गुरुदेव जहां भी जाते थे उनके चरण चिन्ह छप जाते थे। ऐसे महामना की सेवा करने उनके समीप बैठने का जो अवसर मुझे मिला है वह में शब्दों में वर्णन नहीं कर सकता।
वह कहते हैं कि शायद उन्हीं के ही संस्कार और उन्हें का आशीर्वाद दे कि आज में धर्मपथ पर चल रहा हूं एक महान संत का जितना वर्णन लिखा जाए कम होगा।
जब गुरुदेव का वर्षा योग हेतु रामगंज मंडी नगर में प्रवेश हुआ था तब इंद्रदेव भी जमकर बरस रहे थे और जैसी ही गुरुदेव ने शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के बाहर जमकर बरसे शायद ऐसा लग रहा हो कि इंद्रदेव भी उनकी अगवानी में आए हो और उनके चरणों को धोकर उनके चरण रज अपनी मस्तक पर लगा रहे हो।
समाज के वरिष्ठ व्यक्तियों ने कुछ छाया चित्रों का संकलन दिगंबर जैन मंदिर में रखा हुआ था जिसे स्कैन करा कर संकलित किया है।
कुछ पंक्तियां गुरु चरणों मे
स्वयं तिर गए
लाखों को तारा
आज इस धरती पर
गुरुदेव सन्मति सागर जी
के शिष्यों का हमे सहारा
आप ना होते गुरुदेव
धर्म का बसंत ना खिला होता
आप जैसा समाधि सम्राट
कैसे इस जगत को मिला होता
करते है नमन वंदन
समाधि दिवस आज
गुरुवर तुम्हारा
गुरुदेव सन्मति सागर जी
के शिष्यों का हमे सहारा
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


























