कभी अपने पद,पैसा, वक्त और किस्मत पर घमंड नहीं करना क्योंकि सुबह उनकी भी होती है जिनके दिन खराब होते हैं सब दिन होत न एक समान प्रसन्न सागर महाराज
नई दिल्ली
अन्तर्मना आचार्य श्री108 प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा भारत मंडपम दिल्ली से तरुणसागरम तीर्थ गाजियाबाद की लिए चल रही है उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि कभी अपने पद, पैसा, वक्त और किस्मत पर घमंड नहीं करना..
क्योंकि सुबह उनकी भी होती है जिनके दिन खराब होते हैं..!सब दिन होत ना एक समान
मनुष्य जीवन में द्वेष, ईर्ष्या, जलन होना कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात तो यह है कि उसकी सोच ही ऐसी है। ईर्ष्या, द्वेष आदमी की उन्नति में बाधक है। जैसे गन्दगी होने से स्थान दूषित हो जाता है वैसे ही – ईर्ष्या, द्वेष, कषाय से अच्छा मन भी गन्दा हो जाता है। अक्सर मनुष्य के भीतर ये गुण तब प्रकट होते हैं जब कोई अपना उन्नति की ओर अग्रसर होता है, नाम पहचान बढ़ती है, या लोक प्रियता बढ़ती है। जब हम दूसरे की प्रगति को देख नहीं पाते हैं तब ये दुर्गुण पनपने लगते हैं। ऐसे लोग अक्सर दु:खी परेशान होकर, अशान्ति का जीवन जीते हैं। जबकि अपनों को अपने की कार्य शैली देखकर, मेहनत-मशक्कत देखकर खुश होना चाहिए। यही मनुष्य जीवन का आर्दश फार्मूला और मानवीय गुण है।
मैं देख रहा हूं – आदमी बड़े पद पर बैठकर अन्धा और बुद्धि हीन हो जाता है। फिर वह ना खुद की आँख से देखता है, ना खुद की बुद्धि से निर्णय लेता है। दो पैसे का नौकर – बाबू के कान में जो विष घोल देता है, बस उस पर ही निर्णय हो जाता है। यही कारण है कि आज पद की गरिमापूर्ण स्थिति खतरे में आ रही है और लोगों का रूझान भी खत्म सा हो रहा है। इसलिए जीवन में उचित-अनुचित का निर्णय दोनों पक्षों की बात को सुनकर लेना चाहिए।
अन्यथ: छोटी सी एक भूल सबके लिये भारी पड़ सकती है।
जरूरी नहीं है कि बीमार होने की वजह, बीमारी ही हो..कुछ लोग दूसरों की उन्नति, लोकप्रियता और खुशी देख कर भी बीमार हो जाते हैं…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






