साधारण मनुष्य का जन्म उनके परिवार तथा रिश्तेदारों तक की सीमित रहता है लेकिन त्रिलोकी नाथ का जन्म तीनों लोकों में खुशी स्थापित करता है प्रमाण सागर महाराज
सिलवानी
साधारण मनुष्य का जन्म उनके परिवार तथा तक ही सीमित रहता है, लेकिन “त्रिलोकीनाथ” का जन्म तीनों लोकों में खुशी स्थापित करता है,उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने सिलवानी नगर में आयोजित चार दिवसीय लघु पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत “जन्मकल्याणक” पर महा महोत्सव पर व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि आज आप लोग बहुत खुश नजर आ रहे हो क्यों कि भगवान का जन्म केवल लोक में खुशी के लिए नहीं,जन्म मरण से ऊपर उठकर धर्म की स्थापना के लिए होता है,उन्होंने कहा कि वैसे तो में प्रायः गर्भ और जन्म कल्याणक की मंचीय क्रियाओं से दूर ही रहता हुं, लेकिन आज आप लोगों ने जन्मकल्याणक की क्रियाओं के बीच में बैठा दिया तो मुझे बहूत आनंद आया।

मुनि श्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में गर्भ और जन्म कल्याणक का जो वर्णन दिया है वह बहूत ही सटीक एवं सार गर्भित है। आप लोगों ने देखा कि देवराज इंद्र अपनी संपूर्ण देवसेना और चतुर निकाय देवों के साथ जब अयोध्या नगरी मे प्रवेश किया राजमहल के बाहर खड़े रहकर अपनी पटरानी इंद्राणी शची को माता मरुदेवी के पास भेजते हैं,शचि इंद्राणी भी माता को (मायावी नींद) में सुलाकर बालक तीर्थंकर को देखती है,हर्ष विभोर होकर उसे उठाती है तथा उसकी जगह एक ‘मायामई बालक’ को लेटा देती हैं, जिससे मां उठ जाए तो बालक को न पाकर भयभीत न हो और वह तीर्थंकर बालक को हर्ष के साथ सौधर्म इंद्र को सौंपती हैं, भाव विभोर होकर इंद्र एरावत हाथी पर उस तीर्थंकर बालक को ले जाता है और उसका अभिषेक संपन्न कर वापिस अपनी इंद्राणी के साथ राजमहल में जाता है और इंद्राणी उस बालक को माता मरुदेवी के पास लेटाकर उसे मायावी निद्रा से बाहर निकालती है।मुनि श्री ने कहा कि अक्सर कर पंचकल्याणक की क्रियाओं में भावों के अतिरेक में दिखाया जाता है उसमें सौधर्म इंद्र और रानी शची के बीच ऐसे सम्वाद दिखाये जाते है जो कि कतई उचित नहीं। 
उन्होंने सभी प्रतिष्ठाचार्यों को कहा कि आज की युवा पीढ़ी आदिपुराण तो पड़ती नहीं जो कार्यक्रम आप लोग दिखाओगे वही सत्य मान लेगी,इसलिये जब भी कोई दृश्य दिखाओ तो उसमें भावना प्रधान सम्वाद हों,जिसमें सजीवता दिखे आप लोग रोचकता लाने के लिये पति पत्नी के रुठने मनाने के जो दृश्य डाल देते हो यह बिल्कुल उचित नहीं इस प्रकार से कोई नया आदिपुराण मत रचो जिससे नई पीढी भ्रमित हो,
मुनि श्री ने कहा कि यह पंचकल्याणक का कार्यक्रम छोटे पंडाल में होने के कारण आप सभी लोग भगवान के अधिक करीब बैठ पाए और आप सभी ने भरपूर आनंद भी लिया उन्होंने कहा कि पंच कल्याणक का यह कार्यक्रम अल्पकाल और अल्प खर्च में पूर्ण आनंद दे रहा है।उन्होंने कहा कि बड़े मंच पर इतना आनंद नहीं आता क्यों कि आप इतने पास नहीं बैठ पाते हो उन्होंने आशीर्वाद देते हुये कहा कि जैसे क्लास रूम से कोचिंग में ज्यादा आनंद आता है उसी प्रकार आप लोग इस पंचकल्याणक का आनंद उठायें और जन्म महोत्सव की शोभायात्रा का भरपूर आनंद उठायें उन्होंने कहा कि मुझे यह सुनकर बड़ा हर्ष हो रहा है,कि कभी गुरुदेव ने आपके यंहा पंचकल्याणक कराये थे और वह पंचकल्याणक के निमित्त से ही आये थे और वह साआनंद संपन्न हुआ लेकिन हम तो सिर्फ आप लोगों के आग्रह से कुछ समय के लिये ही आये थे लेकिन ऐसा कुछ हो गया जो न आपने सोचा था और न हमने सोचा था इसमें भी ऊपर से पूज्य गुरुदेव का ही आशीर्वाद है उन्होंने कहा कि
इस चार दिवसीय आयोजन को केवल एक कार्यक्रम के रूप में न देखें,बल्कि इसे अपने जीवन का टर्निंग पॉइंट बनाने का प्रयत्न करें तथा ऐसा पुण्यार्जन हो और आत्मा की पात्रता ऐसी जगे कि साक्षात आपको आपके कल्याणक का सौभाग्य प्राप्त हो, आपको सम्यक दर्शन की प्राप्ति हो,तथा रत्नत्रय की वृद्धि हो,जिससे जीवन आगे बढ़े।
उपरोक्त जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन ने देते हुये बताया नगर में जन्मकल्याणक की शोभायात्रा निकाली गई।एवं पांडुक शिला पर जन्माभिषेक संपन्न हुआ।तथा सांयकालीन शंकासमाधान संपन्न हुआ।इस अवसर पर मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित संपूर्ण संघ मंच पर विराजमान था। सोमवार को राज्याभिषेक के साथ राजदरबार एवं नीलांजना नर्तकी का नृत्य एवं उसकी आ सामायिक मृत्यु एवं आदि कुमार को वैराग्य के साथ तप कल्याणक की समस्त क्रियायें दिखाई जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






