जीवन की यह आपाधापी की दौड़ कहीं रुकने वाली नहीं है, हम जिस स्थिति में है हमें स्वयं उसमें संतुष्ट होना है और बच्चों के अंदर भी संतुष्टि के संस्कार डालना है संभवसागर महाराज 

धर्म

जीवन की यह आपाधापी की दौड़ कहीं रुकने वाली नहीं है, हम जिस स्थिति में है हमें स्वयं उसमें संतुष्ट होना है और बच्चों के अंदर भी संतुष्टि के संस्कार डालना है संभवसागर महाराज 

      विदिशा 

“हम जिस मुकाम पर है जिस परिवेश में है,जिस स्थिति में है हमें स्वंय उससे संतुष्ट होंना है,तथा अपने बच्चों के अंदर भी संतुष्ठी के संस्कार डालना है,जीवन की यह आपाधापी की दौड़ कही रूकने वाली नहीं” उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने रविवारीय धर्मसभा में व्यक्त किये।

 

 

 

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया रविवार होंने से आचार्य गुरुदेव के चित्र अनावरण तथा दीप प्रज्वलन सम्रग पाठशाला समिति की सभी दीदियों को मिला आज सभी पाठशालाओं के बच्चों ने प्रातःकाल आचार्य गुरुदेव की संगीतमय पूजन की एवं धर्मसभा में बैठे।

इस अवसर पर मुनि श्री ने बच्चों को एक रेल चली भाई रेल चली की रोचक कहानी सुनाई जिसमें सभी बच्चे आगे पीछे डिब्बे बनते है तथा पहला बच्चा इंजन तथा अंतिम बच्चा गार्ड के रूप में रहता है। 

 

मुनि श्री ने कहा कि सभी बच्चे आगे पीछे होते रहते है क्योंकि सभी को इंजन बनकर आगे तथा बीच में चलने की भावना रहती है लेकिन उन सभी में जो गार्ड के रुप में आखरी बच्चा था वह अंत तक गार्ड बना रहता है जब उससे पूछा तो उसने कहा कि इंजन बनने या बीच में जाने के लिये शर्ट की जरूरत पड़ेगी जिसे पकड़कर मेरे पीछे दूसरा बच्चा चल सके लेकिन मेरे पास तो मात्र एक हाफ पेंट ही है और में इसी में बहूत खुश हूं।

 

 

 

 मुनि श्री ने कहा कि इस कहानी के माध्यम से कहा कि हमारे पास जो कुछ है उसी में व्यक्ति यदि संतुष्ट रहता है,तो वह कभी अपने अंदर हीन भावना नहीं आने देता मुनि श्री ने कहा कि जीवन की यह आपाधापी की यह दौड़ तो कही रुकने वाली नही आदमी जितना जितना आगे बढ़ता है,उसकी इच्छाए उससे दो कदम आगे बढ़ती जाती है,इन इच्छाओं की कभी विराम नहीं है तो उन्होंने बच्चों से कहा कि उस गार्ड वाले बच्चे को याद कर लेना कि वह अभावों से पलने वाला बच्चा कितना खुश नजर आ रहा था और हम तो इतनी सुख सुविधाओं के बीच रह रहे है इसलिये कभी भी अपने माता पिता से किसी बात के लिये जिद मत करना। 

 

 

 

मुनि श्री ने कहा कि आप सभी अपना अपना पुरुषार्थ पूरा करते है लेकिन सभी बच्चे प्रथम स्थान पर नहीं आ सकते इसलिये तुम जिस स्थान पर हो उसी स्थान पर खुश रहने की आदत डालोगे तो देखना एक दिन आप भी टांप करोगे।

 

 

      मुनिश्री ने 2016 का संस्मरण सुनाया

मुनि श्री ने 2016 का संस्मरण सुनाते हुये कहा कि भोपाल के चातुर्मास में आचार्य श्री आपके शीतलधाम से ही होकर गये थे।

भोपाल में जैसे ही आगवानी हुई तो मध्यप्रदेश के तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अगवानी की एवं निगम के महापौर आलोकशर्मा आचार्य श्री के साथ 12 कि. मी. तक पैदल चले थे जब आचार्य श्री मंच पर पहुंचे तो मुख्यमंत्री ने उनके पाद प्रछालन किया था तथा उन्होंने कहा था कि आज मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश की यह राजधानी भोपाल धन्य हो गयी जो गुरुदेव आपके चरण यहा पर पड़े उन्होंने सरकार की तरफ से गुरुदेव का आभार प्रकट करते हुये कहा था कि हमने एक मंत्रालय आनंद मंत्रालय के नाम से बनाया है उन्होंने कहा कि आजकल का इंसान इतनी भागदौड़ कर रहा है फिर भी दुःखी है,उसके ऊपर वर्कलोड बहुत है इसके लिये ही हमने यह मंत्रालय बनाया है लेकिन उस मंत्रालय के लिये अब कोई उपाय खोजने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि आचार्य गुरुदेव खुद संपूर्ण भोपाल के लिये आनंद की वर्षा करने के लिये भोपाल पधारे है।और आप सभी ने उस भोपाल के चातुर्मास को देखा होगा कितनी खुश थी भोपाल की जैन और जैनेत्तर समाज..

 

 

 

. प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रवचन के उपरांत मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने प्रश्नों के माध्यम से लोगों के ज्ञान को खंगारा एवं सही उत्तर देने वालो को पुरस्कार प्रदान किये गये।

           संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *